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Sunday, 12 June 2016


बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनम कपूर का जन्म जिस समय हुआ, उस समय की कुंडली देखें तो सूर्य की स्थिति ने सोनम को बॉलीवुड में प्रसिद्धि दिलाई। चन्द्र ने कलाकार के गुण दिए। सोनम की जन्मकुंडली में मंगल का प्रभाव आर्थिक सुख एवं संपन्नता प्रदान करता है। 

  • Сонам Капур - Индийские актеры и актрисы

 
बुध विरोधी को परास्त करने की शक्ति देता है। इसी के कारण सोनम अपनी मेहनत से बॉलीवुड में उच्च स्थान पर हैं एवं देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। सोनम को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। 2017 स्वास्थ्य की तकलीफ वाला हो सकता है। गुरु ने सोनम को सुंदरता प्रदान की और साथ ही मृदुभाषी बनाया। गुरु के कारण ही सभी लोग सोनम से प्रभावित हो जाते हैं व सम्मान देते हैं।
 
सोनम कपूर के लिए जुलाई 2016 बहुत ही उन्नति और खुशी वाला रहेगा। अगस्त 2016 में सोनम को नई फिल्म का प्रस्ताव मिलेगा और पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी। सितंबर 2016 मध्यम रहेगा एवं इस माह के अंत में शारीरिक पीड़ा होगी। अक्टूबर 2016 में विदेश यात्रा होगी और इस यात्रा से आप देश की आन-बान-शान बढ़ाने में सहयोग देंगी। नवंबर व दिसंबर 2016 में गृहस्थ जीवन खुशहाली वाला रहेगा।
 
जनवरी व फरवरी 2017 आपके लिए फायदेमंद रहेगा, परंतु फरवरी माह का अंत शारीरिक कष्ट या दुर्घटना वाला होगा। ध्यान रखना होगा। मार्च 2017 में राहु की स्थिति ठीक रहेगी। अप्रैल 2017 में किसी डायरेक्टर या किसी कलाकार से मतभेद हो सकते हैं। 
 
मई 2017 नए आयाम लेकर आएगा। इस वर्ष आपके लिए राहु व केतु की शांति करना या करवाना अति उत्तम रहेगा, साथ ही गुरु आराधना करें, इससे भी बहुत लाभ मिलेगा। पुखराज व पन्ने का लॉकेट पहनना लाभप्रद रहेगा।

Thursday, 14 April 2016

राम नवमी पर्व के अवसर पर राम जी का आशीर्वाद लेने के लिए प्रभु श्री-राम की आराधना इस प्रकार करें ताकि प्रभु आपकी मन में वश जाये और आपके मनोरथ पूर्ण करें। 
   प्रत्येक प्राणी के अंदर नाम व् राम का निवास रहता है वस उसे अपने प्रभु की आराधना से जागृत करना चाहिए श्रीराम की आराधना इस राम-नवमी पर ऐसे करें -----




 . "करउ सो मम उर धाम"
  अर्थात वे प्रभु मेरे हृदय में निवास करें।
   "करउ  सो राम हृदय मम अयना"। 
                 अर्थात हे राम ! मेरे हृदय में अपना घर कर लें। 
     "मम हिय गगन इंदु इव बसहु सदा निहकम"। 
  अर्थात आप स्थिर होकर मेरे हृदय रूपी आकाश में चन्द्रमा के समान सदा निवास करें। 
   " मम हृदय करहु निकेत"। 
        अर्थात मेरे हृदय को अपना घर बना लें 
                                        :"
ह्रदि बसी राम काम मद गंजय। 
अर्थात हे प्रभु राम। मेरे हृदय में बस कर काम और अहंकार को नष्ट कर दे। "
प्रभु श्री-राम आपके मनोरह पूर्ण करेंगे 
प्रभु खुद है 
निर्मल मन जन सो मोहि पावा। 
मोहि कपट छल छिद्र न भावा। "
अर्थात-- जिस सेवक का मन निर्मल होता है,वह मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र नहीं सुहाते। 

Saturday, 26 March 2016

शुक्र का कुम्भ राशि पर परभ्रमण व आपका भाग्य........

परिभ्रमण का चक्र निरंतर चलता रहता है, इसी चक्र में शुक्र मकर राशि में परिभ्रमण 
करते हुए वर्तमान में  (मार्च ) कुम्भ राशि में परिभ्रमण कर रहा है शुक्र ग्रह के कुम्भ राशि में भ्रमण करने से आपके भाग्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा,जानिए।
मेष----------> भाग्योदय होगा,धन का आगमन होगा व समाज में यश प्राप्त होगा,पारिवारिक सुख प्राप्त होगा धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी,एवं मांगलिक कार्य के योग बनेंगे।
वृषभ-------->व्यवहार में परिवर्तन आएगा,अपने परिवार के सदस्यों को भी संदेही 
नजर से देखोगे,धार्मिक अनुष्ठान के योग बनेंगे एवं स्थान परिवर्तन होगा।
मिथुन------>आर्थिक स्थिति में अच्छा सुधार होगा व्यापार दूर-दूर तक फैलेगा,भाई 
बंधुओ से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा,भौतिक सुख में वृध्दि होगी।
कर्क -------->वाहन की सुख सुविधा में वृध्दि होगी संतान सुख प्राप्त होगा वाणी की 
नम्रता से आय एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी अत:वाणी में संयम रखे। नए कार्य प्रारम्भहोने  के 
योग बनेंगे।
सिहं ---------.>संतान सुख प्राप्त होगा विलासिता की चाहत में वृद्धि होगी,स्वास्थ्य 
की तकलीफ रहेगी ( कमर दर्द रहेगा )'उद्योग  में वृद्धि होगी आर्थिक सहयोग प्राप्त 
होगा। 
                                                    Image result for nav grah photo
कन्या --------- > आय कम  व् खर्च में  वृद्धि होगी विपक्षी एवं शत्रु प्रबल होंगे बल पूर्वक किए गए कार्य निष्फल होंगे,पिता एवं गुरु से दूर रहने के योग बन रहे है। 

तुला-------->भाग्योदय होगा मान-प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। विद्यार्थी वर्ग की उन्नति होगी 
तंत्र सिध्दियां प्राप्त करने के योग बनेंगे राजनीति में पद प्राप्त होगा।
वृश्चिक-------->भूमि-भवन का लाभ मिलेगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी माता के प्रति 
सेवा में वृद्धि होगी पारिवार से कोई उपहार प्राप्त होगा। शत्रु परास्त होंगे।
धनु--------->स्त्री से सहयोग प्राप्त होगा ,बंधु -भाँधव और पुत्रो का पूर्ण सुख मिलते हुए  भी   मन संतुष्ट नही रहेगा दान धर्म करने में मन विचलित होगा। दोस्ती का विशेष लाभ मिलेगा। 


मकर --------> अविवाहिक के विवाह योग बनेंगे। विद्यार्थी वर्ग की उन्नंती होगी , कोर्ट कचेरी के मामले में  परेशानी आ सकती हे ,परिवार से सहयोग प्राप्त होगा। 


कुम्भ  ------>  धार्मिक व सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। मंत्र सिद्धि के लाभ मिलेंगे। शारीरिक रोग में सुधार  होगा। 

मीन ------>आर्थिक व भौतिक सुख सुविधा में वृधि होगी ,स्वजनो से मन मुटाव की स्थिति बन सकती है जिससे मान प्रतिष्ठा पर प्रभाव पड़ेगा। दोस्तों से सहयोग प्राप्त होगा।  

Thursday, 1 November 2012

कडवा चतुर्थी महिलाए राशि अनुसार कौनसी साड़ी पहने-

कडवा चतुर्थी महिलाए राशि अनुसार कौनसी साड़ी पहने-

कडवा चतुर्थी महिलाए राशि अनुसार कौनसी साड़ी पहने--------------
मेष --->मेष राशि वाली महिलाएँ गुलाबी रंग की साड़ी पहने एवं चंद्रमा के पूजन में गुलाब अवश्य चढ़ाये !
वृषभ --->वृषभ राशि वाली महिलाएँ पीले रंग की साड़ी पहने एवं चन्द्रमा के पूजन   में पिला फूल चढ़ाये !
मिथुन---->मिथुन राशि वाली महिलाएँ हरे रंग की साड़ी पहने एवं चंद्रमा के पूजन में आकड़े के फूल चढाये !
कर्क---->कर्क राशि वाली महिलाये लहरिया साड़ी पहने जिसमे वर्क हो,चंद्रमा के पूजन में सफेद फुल चढ़ाये
सिंह --->सिंह राशि वाली महिलाएँ लाल रंग की साड़ी पहने एवं चंद्रमा के पूजन में
लाल फुल चढ़ाये !
कन्या --->कन्या राशि वाली महिलएँ हरी लाइन वाली साड़ी पहने एवं पूजन में चावल अवश्य चढ़ाये !

तुला--->तुला राशि वाली महिलाएँ गुलाबी रंग की साड़ी जिसमे सफ़ेद धागे की कड़ाई हो पहने एवं पूजन में सफेद गुलाब चढ़ाये !
वृश्चिक --->वृश्चिक राशि वाली महिलाएँ सिंपल ( प्लेन ) साड़ी जिसमे लाल फूल की बनावट हो पहने एवं पूजन में कुकु लाल रंग का प्रयोग करे!
धनु----> धनु राशि वाली महिलाएँ ह्ल्की पीली साड़ी पहने एवं पूजन में पिला व् सफेद फूल चढ़ाए !
मकर---->मकर राशि वाली महिलाएँ कथाई रंग की साड़ी पहने एवं पूजन में आकड़े एवं गेंदे के फूल चढ़ाएं !
कुम्भ --कुम्भ राशि वाली महिलाएँ मेहरून रंग की साड़ी पहने एवं पूजन में लाल गुलाब व् सफेद फुल चढ़ाएं !
मीन -->मीन राशि वाली महिलाएँ नीले रंग की साड़ी पहने एवं पूजन में दुर्बा चढ़ाएं !
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Tuesday, 16 October 2012

कल का मुहुर्त,नौ रात्रि में राशि अनुसार किस देवी का पूजन करे


कल का मुहुर्त

कल का दिन आप के लिए सुखमय रहें !माँ भगवती की कृपा से आपके जीवन में उन्नति आये  !कल आप कुछ करने जा रहे है,तो रुकिए ये कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर

अंग्रेजी तारीख --> 17
वार --बुधवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--शुक्ल
तिथि-->दूज
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--30
योग-- धूम्र   
करण--- कौलब 
चंद्रमा-तुला का रात्रि 12.09 से वृश्चिक का ! 
ग्रहयोग---नौरात्रि उत्सव !
दिन का पर्व---शरद नौरात्रि दूसरा दिन,देवी के दुसरे रूप ब्रम्हाचारणी देवी का पूजन  !
दिशा-शूल-उत्तर
मुहूर्त-व्यापार प्रारंभ मुहुर्त ,धार्मिक अनुष्ठान !
शुभ समय--सुबह 06.00 से 09.00, 10:30 से 12:00,शाम 04.30 से 06.00 तक!
 सुझाव-- कुत्ते को भोजन करने से व्यापार में उन्नति होती है!

नौ रात्रि में राशि अनुसार किस देवी का पूजन करे

 
 





ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी !
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा नमोस्तुते !!
सृष्टी( संसार ) की उत्पत्ति के समय से जन्म -मृत्यु,जरा-ब्याधि,लाभ-हानि का चक्र चला आ रहा है ! मनुष्य आपत्ति-विपत्ति के समय अपने इष्ट देवता,कुलदेवता,गुरु अथवा अपने पितृ देवता के शरण में जाता है!
     त्रिपुर सुंदरी, राज-राजेश्वरी, ममतामयी माँ दुर्गा देवी, जिनके नौ रूपों के अतिरिक्त भी अनन्य रूप है, इन रूपों में से किसी भी रूप की शरण में जा कर भक्त माँ की अराधना करता है,  तो माँ अवश्य अपने भक्त को शरण में लेकर उसके कष्टों को दूर कर देती है,अत:भक्त ( मनुष्य ) ने माँ के शरण में जाकर उनकी अराधना  करना चाहिए! नौ रात्रि में राशि अनुसार माँ के किस रूप की अराधना करनी चाहिए, देखे -----------

मेष---> मेष राशि वाले जातक "माँ मंगला देवि" की अराधना करे !
           ॐ मंगला देवी नम:का जाप करे !
वृषभ---> वृषभ राशि वाले जातक "माँ कात्यायनी" की अराधना करे!
                   ॐ  कात्यायनी नम: का जाप करे !
मिथुन ---> मिथुन राशि वाले जातक "माँ दुर्गा" की अराधना करे !
                  ॐ दुर्गाये नम: का जाप करे  !
कर्क-----> कर्क राशी वाले जातक "माँ शिवाधात्री" की अराधना करे !
                   ॐ शिवाय नम: का जाप करे !
सिंह-----> सिंह राशि वाले जातक "माँ भद्रकाली" की अराधना करे!
                   ॐ कालरुपीन्ये नम: का जाप करे !
कन्या----> कन्या राशि वाले जातक "माँ जयंती" की अराधना करे !
                    ॐ अम्बे नम: या "ॐ जगदम्बे नम:" का जाप करे !
तुला-------> तुला राशि वाले जातक माँ के "क्षमा रुप" की अराधना करे
                ॐ दुर्गादेव्यै नम: का जाप करे !
वृश्चिक -----> वृश्चिक राशी वाले जातक "माँ अम्बे" की अराधना करे !
                   ॐ अम्बिके नम: का जाप करे !
धनु---------> धनु राशि वाले जातक "माँ दुर्गा" की अराधना करे !
                 ॐ  दूं  दुर्गाये नम: का जाप करे !
मकर-----> मकर राशि वाले जातक माँ के "शक्ति रूप" की अराधना करे !
                  ॐ दैत्य -मर्दिनी  नम: का जाप करे !
 कुम्भ ------>कुम्भ राशि वाले जातक "माँ चामुण्डा" की अराधना करे !
                ॐ चामुण्डायै नम:का जाप करे !
मीन ------> मीन राशि वाले जातक "माँ तुलजा" की अराधना करे !
                 ॐ तुलजा देव्यै नम:का जाप करे !
इन सरलतम जाप से जो भी भक्त माँ भगवती की अराधना करता है,माँ उस भक्त की हर मनोकामना पूर्ण  करती है!

Monday, 15 October 2012

कल का दिन आप के लिए आनन्दमय रहें !माँ भगवती की कृपा से आपके जीवन में उन्नति आये  !कल आप कुछ करने जा रहे है,तो रुकिए ये कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर

अंग्रेजी तारीख --> 16
वार --मंगलवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--शुक्ल
तिथि-->एकम
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--29
योग-- ध्वांश  
करण--- बव
चंद्रमा-तुला पुरे दिन 
ग्रहयोग---नौरात्रि
दिन का पर्व---शरद नौरात्रि प्रारंभ, देवी घट स्थापना दिवस !
दिशा-शूल-वायव्य
मुहूर्त-व्यापार प्रारंभ मुहुर्त,अग्न्याधान ,धार्मिक अनुष्ठान ,धान्य छेदन 
शुभ समय--सुबह 10:30 से 1:30 ,दोपहर 3:30 से 4 तक
  सुझाव-- चीटियों को बिस्किट का चुरा खिलाने से घर में खोई हुई सुख-सम्रद्धि वापस आती है !

Saturday, 13 October 2012

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त


--->कल का दिन आप के लिए आनन्दमय रहें !कल आप कुछ करने जा रहे है,तो रुकिए ये कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर

अंग्रेजी तारीख --> 14
वार -- शनिवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> चतुर्दशी ( चौदस )
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--27
योग-- मित्र 
करण---विष्टि
चंद्रमा-कन्या का पुरे दिन
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व---चतुर्दशी का श्राद्ध !
दिशा-शूल--पश्चिम
मुहूर्त--सर्वसिध्दी योग !
शुभ समय--सुबह 09.00 से 12.00,दोपहर 01.25 से03.00तक !
  सुझाव--घर मेंजल का स्थान अग्नि कोण में रहने से घर में आर्थिक परेशानी आती है !

Thursday, 11 October 2012

कल का मुहुर्त


कल का मुहुर्त

--->कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहें !कल आप कुछ करने जा रहे है,मकान या सम्पदा लेने जा रहे है,तो रुकिए ये कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर

अंग्रेजी तारीख --> 12
वार -- शुक्रवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> ध्दाद्शी ( बारस )
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--25
योग-- सिध्द
करण--- तैतिल
चंद्रमा-- सिंह का चंद्रमा
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- ध्दाद्शी का श्राद्ध,
दिशा-शूल--उत्तर
मुहूर्त-- कोई मुहुर्त नहीं !
शुभ समय--11.48 से 12.15 तक !
सुझाव--दो मकानों की मुख्य दीवाल एक दुसरे से लगी हुई नही होना चाहिए मालिक दुखी रहता है

चंद्र ने बनाया अमिताभ को सबका चहेता





अमिताभ का जन्म इलाहाबाद में प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन के यहां 11 अक्टूबर 1942 में हुआ, जब भारत गुलाम था। अमिताभ का जन्म जब हुआ, उस समय चंद्रमा तुला राशि पर परिभ्रमण कर रहा था। उसके प्रभाव के कारण ही अमिताभ अच्छी कद-काठी (लंबी हाइट) वाले है। कुंडली में बैठे चंद्र की स्थिति ने अमिताभ को आर्थिक सुख दिया एवं घर के प्रत्येक सदस्य का चहेता बनाया। चंद्र के कारण अमिताभ युवा अवस्था में लड़कियों के चहेते रहें।

कुंडली में सूर्य की स्थिति ने अमिताभ को दीर्घसूत्री बनाया। अमिताभ को जीवन में बहुत पराक्रम करना पड़ा, परंतु मंगल ने अपने कार्य के प्रति कृतज्ञ बनाया, इसी वजह से आज अमिताभ बच्चन इस मुकाम तक पहुंचे है। कुंडली में बुध की स्थिति ने अमिताभ के अन्य ग्रहों के कष्टों को भी खत्म किया, बुध के कारण ही अमिताभ दूसरों की सेवा और मदद करते रहें, परंतु स्वयं हमेशा रोगी रहें। मिथुन के बुध ने धनवान एवं बुद्धिमान बनाया।

अमिताभ के जन्म के समय गुरु कर्क राशि पर थे, जिसके कारण आज अमिताभ स्त्री, पुत्रादि तथा धन से संपन्न है। कुंडली में गुरु के प्रभाव के कारण ही अमिताभ आर्थिक और मानसिक सुखी है। इसी के साथ अपने पिता का नाम रोशन करने में सफल रहे एवं भोगी कम परोपकारी अधिक है। शुक्र ने भी अमिताभ को सुख दिया एवं अपने दर्शकों का हमेशा चहेते बनाएं रखा।


अमिताभ के जीवन में मनपसंद शादी (लव-मैरिज) के योग बने, यह योग कुंडली में बुध एवं शुक्र की स्थिति के कारण ही बना। शनि ने अमिताभ को तेज बुद्धि वाला एवं मृदु (मीठे) स्वभाव का बनाया।

शनि ने ही अमिताभ को राजनैतिक सुख प्रदान किया था। कुंडली में राहु की स्थिति के कारण पसली संबंधी ‍तकलीफ रही एवं बाद में भी हो सकती है। केतु भी आपको तकलीफ दे सकता है। अत: राहु-केतु की शांति कराना चाहिए।

अमिताभ का जन्म मंगल की महादशा में हुआ, जिसका भोग्यकाल 10 माह 14 दिन रहा। वर्तमान में बुध की महादशा चल रही है, जो 25.8.1996 से शुरू हुई एवं 25.8.2013 तक रहेगी। बुध की महादशा में 16.12.2010 शनि की अंतर्दशा चल रही है, जो की 25.8.2013 तक रहेगी। साथ ही केतु की महादशा 25.8.2013 से 25.8.2020 तक रहेगी।

अमिताभ के लिए नवंबर 2012 शुभ रहेगा, दिसंबर मध्यम रहेगा, जनवरी 2013 लाभप्रद रहेगा, फरवरी एवं मार्च स्वास्थ्य के लिए तकलीफदायक रहेगा, अप्रैल-मई सामान्य रहेगा, जून में बड़े प्रस्ताव आएंगे, जुलाई व अगस्त पुन: स्वास्थ्य के लिए तकलीफदायक रहेगा, सितंबर 2013 स्वास्थ्य में सुधार होगा एवं लाभप्रद रहेगा।

Wednesday, 10 October 2012

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त

--->कल का दिन आप के लिए मंगलमय रहें !कल आप कालेज में प्रवेश लेने जा रहे है,जल सम्बन्धी कार्य करने जा रहे है,मकान या सम्पदा लेने जा रहे है,तो रुकिए ये कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर

अंग्रेजी तारीख --> 11
वार -- गुरुवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> एकादशी 
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--24
योग-- अमृत 
करण--- वव
चंद्रमा---11.50 कर्क का चंद्रमा 11,50 से सिंह का चंद्रमा  
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- एकादशी का श्राद्ध,इंदिरा एकादशी व्रत !
दिशा-शूल--अग्नि
मुहूर्त-- विधा-आरंभ मुहुर्त,संपदाक्रय,कुपखनन,विजवोवानी मुहुर्त !
शुभ समय--प्रात:06 से 07 .30 ,10 .दोपहर 12.00 से 03.00 ,शाम 4 .30 से 06 शाम तक !
  सुझाव--घर में एकादशी के दिन चावल नही बनाना चाहिए !

रेखा को गुरु ने बनाया विख्यात

रेखा को गुरु ने बनाया विख्यात
रेखा : जन्मदिन की शुभकामनाएं


रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को चेन्नई में हुआ। रेखा ने फिल्मों में अपने अभिनय को इतना जीवंत निभाया कि दर्शकों के चहेते बनते चले गए।

रेखा के जन्म समय में चन्द्र वृश्चिक राशि पर परिभ्रमण कर रहा था, जिसने रेखा को लोक विख्यात बनाया। कुंडली में चन्द्र की स्थिति के कारण रेखा ने अपने पराक्रम के द्वारा ख्याति एवं धन अर्जित किया। सूर्य ने रेखा को अच्छी उन्नति प्रदान की, परंतु कुंडली में मंगल की स्थिति ने रेखा को पारिवारिक सुख में कष्ट दिए अर्थात् रेखा अपनी गृहस्थी ठीक से नहीं निभा पाई।

मंगल ने रेखा को उग्र स्वभाव का भी बनाया। रेखा के जन्म समय में बुध कन्या राशि पर भ्रमण कर रहा था, जिसके प्रभाव से रेखा आर्थिक सुखी है। कुंडली में गुरु जिस भाव में बैठा है, उसके कारण आज रेखा यशस्वी, दार्शनिक, देश-विदेश में विख्यात है। गुरु ने भी रेखा को आर्थिक सुख प्रदान किया।

कुंडली में शुक्र की स्थिति ने रेखा को आर्थिक सुख तो प्रदान किया, परंतु कही-कही स्वजनों को बैरी भी बनाया। शनि स्वराशि में होने से रेखा ने फिल्मों में उच्च स्थान प्राप्त किया एवं उन्हें राजनिति में उच्च पद मिला। राहु एवं केतु कष्ट दे सकते हैं।

रेखा का जन्म शनि की महादशा में हुआ, जिसका भोग्यकाल 4 वर्ष 8 माह 7 दिन रहा। 17 जून 1993 से शुक्र की महादशा चल रही है जो 17 जून 2013 तक चलेगी। शुक्र की महादशा में 17 अप्रैल 2012 से केतु की अंतर्दशा चल रही है जो 17 जून 2013 को समाप्त होगी। शुक्र की महादशा समाप्त होने के बाद 17 जून 2013 से सूर्य की महादशा चलेगी, जिसकी अवधि 6 वर्ष रहेगी, अर्थात् 17 जून 2019 को समाप्त होगी।

नवंबर 2012 रेखा के लिए लाभप्रद रहेगा, दिसंबर सामान्य रहेगा। जनवरी 2013 तकलीफ वाला रहेगा, फरवरी एवं मार्च मध्यम रहेगा, अप्रैल ठीक रहेग, मई-जून कष्टप्रद हो सकता है, जुलाई धार्मिक आस्था वाला रहेगा, अगस्त सामान्य बीतेगा, सितंबर 2013 अच्छा रहेगा। रेखा ने पन्ना धारण करना चाहिए।

Tuesday, 9 October 2012

कल का मुहुर्त


कल का मुहुर्त --->कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहें ! कल आप कुछ नया कार्य करने जा रहें है,कुछ लेने जा रहे है,तो रुकिए हर कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 10
वार -- बुधवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934 photo
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> दशमी 
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--23
योग-- मातंग
करण--- वव
चंद्रमा---कर्क का चंद्रमा पुरे दिन   
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- दशमी का श्राद्ध
दिशा-शूल--उत्तर
मुहूर्त-- पुरे दिन भद्रा
शुभ समय--प्रात:06 से 09 .00 ,10 .30 से 12 .00 दोपहर, 1 .30 ,दोपहर 3 ,4 .30 से 06 शाम तक !   
सुझाव--घर में मोरपंख रखने से नकारात्मक उर्जा घर में नही आती !  

Monday, 8 October 2012

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त

कल का दिन आप के लिए मंगलमय रहें! आपके जीवन में कल उन्नति रूपी सूरज का प्रकश आये,कल आप यात्रा करने जा रहें है ,कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो ,पूंजी निवेश करने जा रहें है ,तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
 कल का मुहुर्त ---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 09
वार -- मंगलवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> नवमी 
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--22
योग-- स्थिर
करण--- तैतिल
चंद्रमा---कर्क   
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- नवमी का श्राद्ध 
दिशा-शूल--वायव्य
मुहूर्त--शल्य चिकित्सा ,यात्रा , पूंजी निवेश
शुभ समय--प्रात:10 .30 से दोपहर 1 .30 ,दोपहर 3 से 4 .30 तक   
सुझाव-- घर के मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पल रखने से नकारात्मक ऊर्जा घर में आती है! 

Saturday, 6 October 2012

कल का मुहूर्त


कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहे ! आप कल कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
jain gahuli photo
 कल का मुहूर्त---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 8
वार -- सोमवार 
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> अष्टमी
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--21
योग-- काल
करण---वालब
चंद्रमा---मिथुन का रात्रि 2 :43 से कर्क का    
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--अष्टमी का श्राद्ध,महालक्ष्मी पूजन 
दिशा-शूल--पूर्व
मुहूर्त--शल्य चिकित्सा ,यात्रा
शुभ समय--प्रात:6 से 7 :30 , 9 से 10 :30 , दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक   
सुझाव--श्राद्ध पक्ष में गाय, कुत्ते व कौए को भोजन खिलाने से पितृ प्रसन्न होते है !

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त

कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहे ! आप कल कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
 कल का मुहुर्त ---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 7
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> सप्तमी
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--20
योग--ध्वांक्ष
करण--बव
चंद्रमा---मिथुन पुरे दिन    
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष (विविध दोष ) 
दिन का पर्व--सप्तमी का श्राद्ध
दिशा-शूल--पश्चिम
मुहूर्त--पूंजी निवेश, प्रसूति स्नान , वाटिका रोपण ,शल्य चिकित्सा
शुभ समय--प्रात:8 :55 से 11 :55 तक दोपहर 1 :30 से 3 तक  
सुझाव--श्राद्ध पक्ष में पितरो के लिए तर्पण देने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है एवं कुल की वृद्धि होती है !

Friday, 5 October 2012

अक्टूम्बर २०१२ ज्योतिष की नजर से

-----> परिभ्रमण संसार के चक्र के शत से चल रहा है,परिवर्तन भी समय के साथ-साथ चलता रहता है,ये दोनों
न हो तो संसार रुक जाये! इस संसार में स्थरता आ जाये ! अक्टूम्बर २०१२ में ग्रहों का परिभ्रमण एवं उनका राशि परिवर्तन का संसार पर क्या
असर पड़ता है जानिये ---------------------
 
अक्टूम्बर २०१२ में पाँच मंगलवार पड़ रहें है,इसके प्रभाव से कहीं रक्तपात होगा तथा कहीं छत्रभंग होने का भय रहेगा! सूर्य का तुला राशि में परिभ्रमण करने से उत्तर के देशो में सुभिक्ष ( शुभ ) फल देगा,पश्चिम के देशो में युध्द आदि की सम्भावना से भय का वातावरण रहेगा,दक्षिन एवं पूर्व
के देशो में पीड़ा एवं अशांति रहेगी! मंगल का वृश्चिक राशि में परिभ्रमण करने से सभी द्रव्य महंगे होंगे तथा शासको में क्रोध की अधिकता होगी,
शासको एवं जनता में टकराव होगा ! बुध का तुला राशि में परिभ्रमण करने से क्लेश,कलह,अशांति एवं का वातावरण बनेगा! शुक्र का सिंह राशि में परिभ्रमण करने से सोने के भाव में फर्क आएगा  , शनि का प्रभाव सामान्य रहेगा! १७ अक्तुम्वर को सूर्य अपनी राशि परिवर्तन कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा जिसके प्रभाव से पश्चिम के देशो में सुख होगा,उत्तर एवं पूर्व के देशो में कष्ट तथा बालको को पीड़ा रहेगी,दक्षिन के देशो में युध्द का भय रहेगा! २४ अक्टूम्बर को बुध अपनी राशि परिवर्तन कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा! "बुधो वृश्चिक राशिस्थो सुभिक्षम तत्र धान्यानां लोकानां च शुभम भवेत् "!! अर्थात बुध का वृश्चिक राशि में परिभ्रमण करने से धान्य का सुभिक्ष होगा एवं लोंग सुखी होंगे एवं शांति होगी, घी, तेल के भाव में परिवर्तन आएगा! २३ अक्टूम्बर को शुक्र भी अपनी राशि परिवर्तन कर कन्या राशि में प्रवेश करेगा, शुक्र का कन्या राशि में परिभ्रमण करने से सभी धान्यो के भाव में परिवर्तन होगा,
इस मह की कुंडली को मौसम की द्रष्टि से देखे तो सूर्य के आगे बुध के होने से तेज वायु के साथ आंधी-तूफान की संभावना है! कुछ स्थानों में बादल के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होगी! जम्मू-कश्मीर, हिमाचल-प्रदेश,हरियाणा,पंजाब,दि
ल्ली,राजस्थान,आसाम,गुजरात,उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश,
उत्तराखंड में कुछ स्थानों में हलकी बूंदाबांदी होगी! ऋतु परिवर्तन के का अहसास होने लगेगा!

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न--

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न---> प्रत्येक मनुष्य की इच्छा रहती है कि वह एवं उसका परिवार सुखी एवं संपन्न रहें! मनुष्य ने अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए देवता के साथ-साथ अपने पितरो का भी पूजन करना चाहिए! कैसे करे पितृ पूजन--------

यहाँ पर पाठको की सुबिधा के लिए संक्षिप्त में सरल हिंदी भाषा में पजन ( तर्पण ) बिधि दे रहें है!  ( तर्पण ही पत्र पजन है!)
सर्वप्रथम अपने पास शुध्द जल,बैठने का आसन ( कुशा का हो ),बड़ी थाली या ताम्रण ( ताम्बे कि प्लेट ), कच्चा दूध,गुलाब के फुल ,फुल-माला, कुशा ,सुपारी, जों,काली तिल,जनेऊ इत्यादी पास में रखे!
आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करे ॐ केशवाय नम:,ॐ माधवाय नम:,ॐ गोविन्दाय नम: आचमन के बाद हाथ धोकर अपने उपर जल छिडके अर्थात पवित्र हो,फिर गायत्री मन्त्र से शिखा बाँधकर तिलक लगाकर कुशे की पवित्री (अंगूठी बनाकर) अनामिका ऊँगली में पहन कर हाथ में जल ,सुपारी,सिक्का,फूल लेकर निम्न संकल्प ले !
अपना नाम एवं गोत्र उच्चारण करे फिर बोले अध् श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्
त्यर्थ देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणम करिष्ये! !
फिर थाली या ताम्रण में जल,कच्चा दूध,गुलाब की पंखुड़ी डाले,फिर हाथ में चावल लेकर देवता एवं ऋषियों का आवाहन करे! स्वयं पूर्व मुख करके बैठे,जनेऊ को सव्य रखे! कुशा के अग्र भाग को पूर्व की ओर रखे,देवतीर्थ से अर्थात दाये हाथ की अंगुलियों के अग्रभाग से तर्पण दे, इसी प्रकार ऋषियों को तर्पण दे!
फिर उत्तर मुख करके जनेऊ को कंठी करके ( माला जैसी ) पहने एवं पालकी लगाकर बैठे एवं दोनों हथेलियों के बीच से जल गिरकर दिव्य मनुष्य को तर्पण दे,
इसके बाद दक्षिन मुख बैठकर,जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखकर बाएं हाथ के नीचे ले जाये, थाली या ताम्रण में काली तिल छोड़े
फिर काली तिल हाथ में लेकर अपने पितरो का आवाहन करे!
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम ;
फिर पितृ तीर्थ से अर्थात अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से तर्पण दे !
१. अपने गोत्र का उच्चारण करे एवं पिता का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
२. अपने गोत्र का उच्चारण करे , दादाजी (पितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
३. अपने गोत्र का उच्चारण करे पिताजी के दादाजी(प्रपितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
४.अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे ,नाना का नाम लेकर उनको तीन बार तर्पण दे !
५. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के पिताजी(परनाना) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
६. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के दादा (वृद्ध परनाना ) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
७. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानी का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे  !
८. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की माँ (परनानी )  का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
९. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की दादी (वृद्ध परनानी )  का नाम  लेकर तीन बार तर्पण दे !
१०.अपने गोत्र का उच्चारण करे अपनी दिवंगत (जो स्वर्गवासी हो ) पत्नी से लेकर परिवार के सभी दिवंगत सदस्य का नाम लेकर तीन-तीन बार -तर्पण दे ! परिवार के साथ -साथ दिवंगत बुआ, मामा, मौसी, मित्र,एवं गुरु को भी तर्पण दे !
विशेष-->जिनके नाम याद नही हो,तो रूद्र,विष्णु,एवं ब्रम्हा जी का नाम उच्चारण कर ले!
इसके बाद भगवान सूर्य को जल चदाये!  फिर कंडे पर गुड घी कि धूप दे, धूप के बाद पाँच भोग निकले जो  पंचबलीकहलाती है!
१. गाय के लिए सव्य होकर पत्ते प्र्भोग लगाकर गाय को दे,
२. स्वान (कुत्ते) के लिए जनेऊ को कंठी करके पत्ते पर भोग लगाकर कुत्ते को दे,
कौओं के लिए ( ककाब्ली ) असावी होकर पृथ्वी पर भोग ल लगाकर कौओं को दे,
४.( देवादिबली ) देवताओ के लिए सव्य होकर पत्ते पर बोग अतिथि को दे,
५.पिपीलिका के लिए सव्य होकर पत्ते पर भोग लगाकर पिपीलिका को दे,
इसके बाद  हाथ में जल लेकर ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: बोलकर ये कर्म भगवान विष्णु जी के चरणों में छोड़ दे!
इस कर्म से आपके पत्र बहुत प्रसन्न होंगे एवं आपके मनोरथ पूर्ण करेंगे!

Wednesday, 3 October 2012

अक्टूम्बर २०१२ ध्दादश राशियों का फलादेश-




अक्टूम्बर २०१२ में  ध्दादश राशियों का फलादेश----> मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेंगा! स्त्री पक्ष की प्रधानता रहेंगी,रोगी व्यक्ति  को रोग से राहत  मिलेगी व्यापार सामान्य रहेगा,नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग है,धार्मिक कार्य में विघ्न आयेंगे! विधार्थी को पढाई
में अडचन आएगी! दि . १०,१५ शुभ है,४ अशुभ है!  गायत्री मंत्र के जाप लाभदायक है!
वृषभ-->वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह भूमि-वाहन के लाभ वाला रहेगा! व्यापारी वर्ग को लाभ मिलेगा,नौकरी में उन्नति होगी, कृषि सामान्य लाभ देगी! शारीरिक कष्ट के योग है ध्यान रखे! पुराने विवाद में व्यय होगा,किसी मित्र से सहयोग प्राप्त करे लाभ मिलेगा ! दि.६,१८ शुभ है,
१४ अशुभ है! राधाकृष्ण की आराधना शुभ है!     
मिथुन-->मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह आध्यात्मिक तरक्की वाला रहेगा! न्यायिक कार्यों में सफलता मिलेगी,परिवार से पूर्ण सहयोग
मिलेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि में भी अच्छा लाभ मिलेगा,नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! दि.७,२१ शुभ है, ५ अशुभ है! श्री गणेश आराधना शुभ
है!
कर्क-->कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होंगे,व्यापार सामान्य रहेगा, कृषि मध्यम लाभ देगी,
नौकरी में मानसिक व्यग्रता बनी रहेगी, माता के पक्ष से सुख प्राप्त होगा,संतान की चिंता रहेगी! दि.१०,२४ शुभ है,३ अशुभ है! श्री सीताराम की सेवा
लाभप्रद है!
सिंह-->सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह सुख वाला रहेगा! माता से लाभ मिलेगा,कार्य की स्थिति उत्तम रहेगी, कृषि लाभ देगी, नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! राजनैतिक स्थिति में सुधार होगा एवं लाभ मिलेगा! दि.२,१४ शुभ है,
कन्या-->कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह स्थान-परिवर्तन वाला रहेगा! विधार्थी को लाभ मिलेगा,इस माह परिश्रम अधिक रहेगा,नौकरी
में उन्नति होगी,कृषि कार्य में लाभ मिलेगा, स्वास्थ्य में सुधार होगा, व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि लाभ देगी! दि.२,१८ शुभ है,२० अशुभ है!
राधाकृष्ण की सेवा लाभप्रद है!
तुला-->तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह मांगलिक कार्य वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होगा,व्यापार में उन्नति होगी,नौकरी में अधिकारी
नाराज हो सकते है ध्यान दे, स्त्री को पीड़ा रहेगी, पारिवारिक तनाव रहेगा! दि.१५,२४ शुभ है, ३० अशुभ है! गायत्री मंत्र लाभदायक है!
वृश्चिक-->वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह कष्ट-प्रद हो सकता है! व्यर्थ खर्च होगा, व्यापार में हानि हो सकती है,नौकरी में परेशानी आएगी, वाहन से हानि के योग बनते है! सहयोग में कमी आएगी, दि.६,२१ अशुभ है,५ अशुभ है! सीता राम की सेवा लाभप्रद है!
धनु-->धनु राशि वाले जातको के लिए यह विशेष कार्य में सफलता वाला रहेगा!नौकरी में उच्चपद प्राप्त होगा,राजनैतिक लाभ मिलेगा,व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि ठीक रहेगी,नौकरी में उन्नति रहेगी,स्वास्थ्य का ध्यान रखे दि.३,१५ शुभ है,७अशुभ है श्री राम सेवा लाभप्रद है!
मकर-->मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह मुकदमे में सफलता वाला रहेगा! व्यापार में उन्नति होगी,माता को पीड़ा रहेगी, नौकरी में ध्यान दे, घर में मांगलिक कार्य होन्ग,परन्तु पारिवारिक बिरोध होगा, दि.६,९ शभ है,१९ अशुभ है! शिव आराधना शुभ है!
कुम्भ -->कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! मांगलिक कार्य होगा,परिश्रम अधिक करना पड़ेगा, व्यापार सामान्य रहेगा, नौकरी में तकलीफ आएगी,कृषि घटा देगी,न्यायिक मुकदमो में सफलता मिलेगी दि.५.१० शुभ है,३ अशुभ है! गायत्री आराधना शुभ है!
मीन-->मीन राशि वाले जातको के लिए यह माह शारीरिक,मानसिक पीड़ा वाला रहेगा! वाहन यात्रा में नुकशान हो सकता है,स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है,व्यापार में सही लाभ नही मिलेगा,कृषि में नुकसान होगा,दि.४,१२ शुभ है, १६ अशुभ है! देवी जी की आराधना लाभप्रद रहेगी!





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Friday, 14 September 2012

बारह राशियों पर शनि का प्रभाव

बारह राशियों पर शनि का प्रभाव


Shani dev

जैसे कुछ ग्रहों के साथ शनिदेव शुभ होते हैं और कुछ के साथ अशुभ फलदायी, उसी प्रकार 12 राशियों में से कुछ में शनि लाभदायक तो कुछ में हानिकारक होते हैं। जिन जातक को शनि की साढ़ेसाती व ढैया का प्रभाव है। जानिए, आपकी कुंडली में शनि किस राशि में हैं और यह आपको किस प्रकार से प्रभावित करेंगे :-

मेष राशि :
राशिचक्र में सबसे पहला स्थान मेष राशि का है। इस राशि में शनि नीच का होता है। शनि नीच होने से यह अशुभ फलदायी होता है। इस राशि शनि की स्थिति से व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होती है। इस राशि में जिनके शनि होता है शनि उन्हें हठी और क्रोधी बनाता है। यह व्यक्ति को बुरी आदतों की ओर ले जाता है। मेष राशि में जब शनि की महादशा चलती है उस समय रिश्तेदारों एवं मित्रों के साथ विरोध उत्पन्न होता है। इस समय संबंधों में दूरियां भी बढ़ जाती हैं।

वृषभ राशि :
वृष राशि राशिचक्र में दूसरी राशि है। जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि इस राशि में होता है वह व्यक्ति असत्य भाषण करने वाला होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऐसा व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता यह अपने स्वार्थ के लिए किसी को धोखा दे सकता है। यह काफी चतुर और शक्तिशाली होता है। काम की भावना इनमें अधिक रहती है।

मिथुन राशि :
मिथुन तीसरी राशि है। इस राशि में शनि का होने पर यह व्यक्ति को दुःसाहसी बनाता है। व्यक्ति चतुर और धूर्त प्रकृति का होता है। राजनीति एवं कुटनीतिक क्षेत्र में इन्हें विशेष सफलता मिलती है। इनमें दया और सद्भावना की कमी होती है। संतान की दृष्टि से यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती है, क्योंकि यह अल्प संतान का योग निर्मित करता है। साहित्य, संगीत एवं सौन्दर्य के प्रति व्यक्ति में विशेष लगाव रहता है।

कर्क राशि :
राशि चक्र की चौथी राशि है कर्क राशि। जिस व्यक्ति की कुंडली में चतुर्थ भाव में शनि होता है वह व्यक्ति जिद्दी और दूसरों से ईर्ष्या करने वाला होता है। स्वार्थ की भावना इनमें प्रबल रहती है। मातृ पक्ष से इन्हें सुख की कमी महसूस होती है। जब शनि की महादशा कर्क राशि में होती है उस समय इन्हें विशेष कष्ट होता है। शनि की महादशा में पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल, मानसिक अशांति, अस्वस्थता मिलती है।

सिंह राशि :
सिंह राशि राशि चक्र में पांचवीं राशि है। इस राशि में शनि के होने से शनि व्यक्ति को गंभीर और चिंतनशील बनाता है। व्यक्ति अपने कार्य में निपुण और परिश्रमी होता है। इस राशि में शनि से प्रभावित व्यक्ति अपनी बातों पर अडिग रहने वाला होता है। गोचर में इस राशि में जब शनि की महादशा चलती है, उस समय इन्हें अत्यधिक परिश्रम करना होता है। अनावश्यक रूप से धन की हानि होती है और मन में निराशात्मक विचार आते रहते हैं।

कन्या राशि :

Shani dev

जिनकी कुंडली में कन्या राशि में शनि होता है वे परोपकारी और गुणवान होते हैं। इस राशि में जिनके शनि होता है वे धनवान और शक्तिशाली होते हैं। कम बोलने वाले और लेखन एवं गंभीर विषयों में रुचि रखने वाले होते हैं। ये सामाजिक कार्यों में शामिल रहते हैं। पारंपारिकता एवं पुराने विचारों में यकीन रखने वाले होते हैं। इस राशि में शनि की महादशा में इन्हें यश और लाभ मिलता है।

तुला राशि :
तुला राशि में शनि उत्तम फल देने वाला होता है। यह व्यक्ति को स्वाभिमानी, महत्वाकांक्षी और भाषण कला में निपुण बनाता है। यह व्यक्ति को स्वतंत्र विचारों वाला और चतुर बनाता है। आर्थिक रूप से मजबूत और कुशल मानसिक क्षमता प्रदान करता है।

वृश्चिक राशि :
शनिदेव जिनकी कुंडली में वृश्चिक राशि में होते हैं वह व्यक्ति जोशीला और क्रोधी होता है। इनमें अभिमान और वैराग्य की भावना रहती है। इनका स्वभाव गंभीर और ईष्यालु होता है। इस राशि में शनि की महादशा जब चलती है तब आर्थिक क्षति और मान-सम्मान की हानि होती है।

धनु राशि :
राशिचक्र में शनि का स्थान नवम है। इस राशि में शनि होने पर यह व्यक्ति को व्यावहारिक और ज्ञानवान बनाता है। व्यक्ति परिश्रमी और नेक विचारों वाला होता है। चतुराई और अक्लमंदी से काम करने वाला एवं दूसरों के उपकार को मानने वाला होता है। इस राशि में जब शनि की महादशा चलती है उस समय व्यक्ति को सुख और उत्तम फल प्राप्त होता है। शिक्षा के क्षेत्र में महादशा के दौरान सफलता मिलती है।

मकर राशि :
राशि चक्र की दसवीं राशि यानी मकर राशि में शनि व्यक्ति को परिश्रमी और ईश्वर के प्रति आस्थावान बनाता है। कारोबार में प्रगति, आर्थिक लाभ, जमीन जायदाद का लाभ यह शनि दिलाता है। शनि इनकी प्रकृति शंकालु बनाता है। लालच और स्वार्थ की भावना भी इनके अंदर रहती है।

कुंभ राशि :
जिनकी कुंडली में शनि एकादश भाव यानी कुंभ राशि में होता है वह व्यक्ति अहंकारी होता है। आर्थिक रूप से सामान्य रहते हैं। कूटनीतिक क्षेत्र में सफल और बुद्धिमान होते हैं। नेत्र रोग से पीडि़त होते हैं। व्यवहार कुशल और भाग्य के धनी होते हैं।

मीन राशि :
मीन राशिचक्र की 12वीं राशि है। मीन राशि में शनि स्थित होने पर यह व्यक्ति को गंभीर बनाता है। व्यक्ति दूसरों से ईर्ष्या रखने वाला व महत्वाकांक्षी होता है। इस राशि में शनि के होने पर व्यक्ति उदार और समाज में प्रतिष्ठित होता है। शनि इनकी आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनाए रखता है।

तिलक क्यों लगाना चाहिए ?



तिलक क्यों लगाना चाहिए ?

तिलक क्यों लगाना चाहिए ?

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक मनुष्य अपने धर्म को बड़े विस्वास एवं आस्था के साथ निभाता है! हिन्दू पूजा करते समय या कहीं जाते समय अवस्य तिलक लगता है! महिलाये भी सुहाग के प्रतीक चिन्ह हेतु तिलक लगाती है! महिलाये लाल तिलक ही लगाती है क्योकि पति जाते समय उस तिलक को देखकर जाता है, जो सूर्य की लालिमा का प्रतीक होता है,एवं तिलक को देखकर पति को ये प्रेरणा मिलती है कि आज का दिन सूर्य कि लालिमा जैसा ( सुखमय ) रहें! एवं हर मांगलिक कार्य,शादी-विवाह,धार्मिक आयोजन,सामाजिक आयोजन में व्यक्ति तिलक लगाकर जाता है !
किसी आयोजन में आने वाले व्यक्ति का स्वागत-सत्कार हम तिलक लगाकर ही करते है! विशेषकर शादी-विवाह में बहन-बेटी या सुहागन आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत तिलक लगाकर करती है! विशेषकर यह प्रथा मध्यप्रदेश में मालवा एवं निमाड़ में यह प्रथा आज भी है!



तिलक मस्तक पर दोनों भौंहों के बीच नासिका के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर लगाए जाते हैं जो हमारे चिंतन-मनन का स्थान है- यह चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है, इसे आज्ञा-चक्र भी कहते हैं।