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Friday, 5 October 2012

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न--

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न---> प्रत्येक मनुष्य की इच्छा रहती है कि वह एवं उसका परिवार सुखी एवं संपन्न रहें! मनुष्य ने अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए देवता के साथ-साथ अपने पितरो का भी पूजन करना चाहिए! कैसे करे पितृ पूजन--------

यहाँ पर पाठको की सुबिधा के लिए संक्षिप्त में सरल हिंदी भाषा में पजन ( तर्पण ) बिधि दे रहें है!  ( तर्पण ही पत्र पजन है!)
सर्वप्रथम अपने पास शुध्द जल,बैठने का आसन ( कुशा का हो ),बड़ी थाली या ताम्रण ( ताम्बे कि प्लेट ), कच्चा दूध,गुलाब के फुल ,फुल-माला, कुशा ,सुपारी, जों,काली तिल,जनेऊ इत्यादी पास में रखे!
आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करे ॐ केशवाय नम:,ॐ माधवाय नम:,ॐ गोविन्दाय नम: आचमन के बाद हाथ धोकर अपने उपर जल छिडके अर्थात पवित्र हो,फिर गायत्री मन्त्र से शिखा बाँधकर तिलक लगाकर कुशे की पवित्री (अंगूठी बनाकर) अनामिका ऊँगली में पहन कर हाथ में जल ,सुपारी,सिक्का,फूल लेकर निम्न संकल्प ले !
अपना नाम एवं गोत्र उच्चारण करे फिर बोले अध् श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्
त्यर्थ देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणम करिष्ये! !
फिर थाली या ताम्रण में जल,कच्चा दूध,गुलाब की पंखुड़ी डाले,फिर हाथ में चावल लेकर देवता एवं ऋषियों का आवाहन करे! स्वयं पूर्व मुख करके बैठे,जनेऊ को सव्य रखे! कुशा के अग्र भाग को पूर्व की ओर रखे,देवतीर्थ से अर्थात दाये हाथ की अंगुलियों के अग्रभाग से तर्पण दे, इसी प्रकार ऋषियों को तर्पण दे!
फिर उत्तर मुख करके जनेऊ को कंठी करके ( माला जैसी ) पहने एवं पालकी लगाकर बैठे एवं दोनों हथेलियों के बीच से जल गिरकर दिव्य मनुष्य को तर्पण दे,
इसके बाद दक्षिन मुख बैठकर,जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखकर बाएं हाथ के नीचे ले जाये, थाली या ताम्रण में काली तिल छोड़े
फिर काली तिल हाथ में लेकर अपने पितरो का आवाहन करे!
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम ;
फिर पितृ तीर्थ से अर्थात अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से तर्पण दे !
१. अपने गोत्र का उच्चारण करे एवं पिता का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
२. अपने गोत्र का उच्चारण करे , दादाजी (पितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
३. अपने गोत्र का उच्चारण करे पिताजी के दादाजी(प्रपितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
४.अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे ,नाना का नाम लेकर उनको तीन बार तर्पण दे !
५. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के पिताजी(परनाना) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
६. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के दादा (वृद्ध परनाना ) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
७. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानी का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे  !
८. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की माँ (परनानी )  का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
९. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की दादी (वृद्ध परनानी )  का नाम  लेकर तीन बार तर्पण दे !
१०.अपने गोत्र का उच्चारण करे अपनी दिवंगत (जो स्वर्गवासी हो ) पत्नी से लेकर परिवार के सभी दिवंगत सदस्य का नाम लेकर तीन-तीन बार -तर्पण दे ! परिवार के साथ -साथ दिवंगत बुआ, मामा, मौसी, मित्र,एवं गुरु को भी तर्पण दे !
विशेष-->जिनके नाम याद नही हो,तो रूद्र,विष्णु,एवं ब्रम्हा जी का नाम उच्चारण कर ले!
इसके बाद भगवान सूर्य को जल चदाये!  फिर कंडे पर गुड घी कि धूप दे, धूप के बाद पाँच भोग निकले जो  पंचबलीकहलाती है!
१. गाय के लिए सव्य होकर पत्ते प्र्भोग लगाकर गाय को दे,
२. स्वान (कुत्ते) के लिए जनेऊ को कंठी करके पत्ते पर भोग लगाकर कुत्ते को दे,
कौओं के लिए ( ककाब्ली ) असावी होकर पृथ्वी पर भोग ल लगाकर कौओं को दे,
४.( देवादिबली ) देवताओ के लिए सव्य होकर पत्ते पर बोग अतिथि को दे,
५.पिपीलिका के लिए सव्य होकर पत्ते पर भोग लगाकर पिपीलिका को दे,
इसके बाद  हाथ में जल लेकर ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: बोलकर ये कर्म भगवान विष्णु जी के चरणों में छोड़ दे!
इस कर्म से आपके पत्र बहुत प्रसन्न होंगे एवं आपके मनोरथ पूर्ण करेंगे!

Wednesday, 3 October 2012

अक्टूम्बर २०१२ ध्दादश राशियों का फलादेश-




अक्टूम्बर २०१२ में  ध्दादश राशियों का फलादेश----> मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेंगा! स्त्री पक्ष की प्रधानता रहेंगी,रोगी व्यक्ति  को रोग से राहत  मिलेगी व्यापार सामान्य रहेगा,नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग है,धार्मिक कार्य में विघ्न आयेंगे! विधार्थी को पढाई
में अडचन आएगी! दि . १०,१५ शुभ है,४ अशुभ है!  गायत्री मंत्र के जाप लाभदायक है!
वृषभ-->वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह भूमि-वाहन के लाभ वाला रहेगा! व्यापारी वर्ग को लाभ मिलेगा,नौकरी में उन्नति होगी, कृषि सामान्य लाभ देगी! शारीरिक कष्ट के योग है ध्यान रखे! पुराने विवाद में व्यय होगा,किसी मित्र से सहयोग प्राप्त करे लाभ मिलेगा ! दि.६,१८ शुभ है,
१४ अशुभ है! राधाकृष्ण की आराधना शुभ है!     
मिथुन-->मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह आध्यात्मिक तरक्की वाला रहेगा! न्यायिक कार्यों में सफलता मिलेगी,परिवार से पूर्ण सहयोग
मिलेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि में भी अच्छा लाभ मिलेगा,नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! दि.७,२१ शुभ है, ५ अशुभ है! श्री गणेश आराधना शुभ
है!
कर्क-->कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होंगे,व्यापार सामान्य रहेगा, कृषि मध्यम लाभ देगी,
नौकरी में मानसिक व्यग्रता बनी रहेगी, माता के पक्ष से सुख प्राप्त होगा,संतान की चिंता रहेगी! दि.१०,२४ शुभ है,३ अशुभ है! श्री सीताराम की सेवा
लाभप्रद है!
सिंह-->सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह सुख वाला रहेगा! माता से लाभ मिलेगा,कार्य की स्थिति उत्तम रहेगी, कृषि लाभ देगी, नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! राजनैतिक स्थिति में सुधार होगा एवं लाभ मिलेगा! दि.२,१४ शुभ है,
कन्या-->कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह स्थान-परिवर्तन वाला रहेगा! विधार्थी को लाभ मिलेगा,इस माह परिश्रम अधिक रहेगा,नौकरी
में उन्नति होगी,कृषि कार्य में लाभ मिलेगा, स्वास्थ्य में सुधार होगा, व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि लाभ देगी! दि.२,१८ शुभ है,२० अशुभ है!
राधाकृष्ण की सेवा लाभप्रद है!
तुला-->तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह मांगलिक कार्य वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होगा,व्यापार में उन्नति होगी,नौकरी में अधिकारी
नाराज हो सकते है ध्यान दे, स्त्री को पीड़ा रहेगी, पारिवारिक तनाव रहेगा! दि.१५,२४ शुभ है, ३० अशुभ है! गायत्री मंत्र लाभदायक है!
वृश्चिक-->वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह कष्ट-प्रद हो सकता है! व्यर्थ खर्च होगा, व्यापार में हानि हो सकती है,नौकरी में परेशानी आएगी, वाहन से हानि के योग बनते है! सहयोग में कमी आएगी, दि.६,२१ अशुभ है,५ अशुभ है! सीता राम की सेवा लाभप्रद है!
धनु-->धनु राशि वाले जातको के लिए यह विशेष कार्य में सफलता वाला रहेगा!नौकरी में उच्चपद प्राप्त होगा,राजनैतिक लाभ मिलेगा,व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि ठीक रहेगी,नौकरी में उन्नति रहेगी,स्वास्थ्य का ध्यान रखे दि.३,१५ शुभ है,७अशुभ है श्री राम सेवा लाभप्रद है!
मकर-->मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह मुकदमे में सफलता वाला रहेगा! व्यापार में उन्नति होगी,माता को पीड़ा रहेगी, नौकरी में ध्यान दे, घर में मांगलिक कार्य होन्ग,परन्तु पारिवारिक बिरोध होगा, दि.६,९ शभ है,१९ अशुभ है! शिव आराधना शुभ है!
कुम्भ -->कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! मांगलिक कार्य होगा,परिश्रम अधिक करना पड़ेगा, व्यापार सामान्य रहेगा, नौकरी में तकलीफ आएगी,कृषि घटा देगी,न्यायिक मुकदमो में सफलता मिलेगी दि.५.१० शुभ है,३ अशुभ है! गायत्री आराधना शुभ है!
मीन-->मीन राशि वाले जातको के लिए यह माह शारीरिक,मानसिक पीड़ा वाला रहेगा! वाहन यात्रा में नुकशान हो सकता है,स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है,व्यापार में सही लाभ नही मिलेगा,कृषि में नुकसान होगा,दि.४,१२ शुभ है, १६ अशुभ है! देवी जी की आराधना लाभप्रद रहेगी!





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Friday, 14 September 2012

बारह राशियों पर शनि का प्रभाव

बारह राशियों पर शनि का प्रभाव


Shani dev

जैसे कुछ ग्रहों के साथ शनिदेव शुभ होते हैं और कुछ के साथ अशुभ फलदायी, उसी प्रकार 12 राशियों में से कुछ में शनि लाभदायक तो कुछ में हानिकारक होते हैं। जिन जातक को शनि की साढ़ेसाती व ढैया का प्रभाव है। जानिए, आपकी कुंडली में शनि किस राशि में हैं और यह आपको किस प्रकार से प्रभावित करेंगे :-

मेष राशि :
राशिचक्र में सबसे पहला स्थान मेष राशि का है। इस राशि में शनि नीच का होता है। शनि नीच होने से यह अशुभ फलदायी होता है। इस राशि शनि की स्थिति से व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होती है। इस राशि में जिनके शनि होता है शनि उन्हें हठी और क्रोधी बनाता है। यह व्यक्ति को बुरी आदतों की ओर ले जाता है। मेष राशि में जब शनि की महादशा चलती है उस समय रिश्तेदारों एवं मित्रों के साथ विरोध उत्पन्न होता है। इस समय संबंधों में दूरियां भी बढ़ जाती हैं।

वृषभ राशि :
वृष राशि राशिचक्र में दूसरी राशि है। जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि इस राशि में होता है वह व्यक्ति असत्य भाषण करने वाला होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऐसा व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता यह अपने स्वार्थ के लिए किसी को धोखा दे सकता है। यह काफी चतुर और शक्तिशाली होता है। काम की भावना इनमें अधिक रहती है।

मिथुन राशि :
मिथुन तीसरी राशि है। इस राशि में शनि का होने पर यह व्यक्ति को दुःसाहसी बनाता है। व्यक्ति चतुर और धूर्त प्रकृति का होता है। राजनीति एवं कुटनीतिक क्षेत्र में इन्हें विशेष सफलता मिलती है। इनमें दया और सद्भावना की कमी होती है। संतान की दृष्टि से यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती है, क्योंकि यह अल्प संतान का योग निर्मित करता है। साहित्य, संगीत एवं सौन्दर्य के प्रति व्यक्ति में विशेष लगाव रहता है।

कर्क राशि :
राशि चक्र की चौथी राशि है कर्क राशि। जिस व्यक्ति की कुंडली में चतुर्थ भाव में शनि होता है वह व्यक्ति जिद्दी और दूसरों से ईर्ष्या करने वाला होता है। स्वार्थ की भावना इनमें प्रबल रहती है। मातृ पक्ष से इन्हें सुख की कमी महसूस होती है। जब शनि की महादशा कर्क राशि में होती है उस समय इन्हें विशेष कष्ट होता है। शनि की महादशा में पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल, मानसिक अशांति, अस्वस्थता मिलती है।

सिंह राशि :
सिंह राशि राशि चक्र में पांचवीं राशि है। इस राशि में शनि के होने से शनि व्यक्ति को गंभीर और चिंतनशील बनाता है। व्यक्ति अपने कार्य में निपुण और परिश्रमी होता है। इस राशि में शनि से प्रभावित व्यक्ति अपनी बातों पर अडिग रहने वाला होता है। गोचर में इस राशि में जब शनि की महादशा चलती है, उस समय इन्हें अत्यधिक परिश्रम करना होता है। अनावश्यक रूप से धन की हानि होती है और मन में निराशात्मक विचार आते रहते हैं।

कन्या राशि :

Shani dev

जिनकी कुंडली में कन्या राशि में शनि होता है वे परोपकारी और गुणवान होते हैं। इस राशि में जिनके शनि होता है वे धनवान और शक्तिशाली होते हैं। कम बोलने वाले और लेखन एवं गंभीर विषयों में रुचि रखने वाले होते हैं। ये सामाजिक कार्यों में शामिल रहते हैं। पारंपारिकता एवं पुराने विचारों में यकीन रखने वाले होते हैं। इस राशि में शनि की महादशा में इन्हें यश और लाभ मिलता है।

तुला राशि :
तुला राशि में शनि उत्तम फल देने वाला होता है। यह व्यक्ति को स्वाभिमानी, महत्वाकांक्षी और भाषण कला में निपुण बनाता है। यह व्यक्ति को स्वतंत्र विचारों वाला और चतुर बनाता है। आर्थिक रूप से मजबूत और कुशल मानसिक क्षमता प्रदान करता है।

वृश्चिक राशि :
शनिदेव जिनकी कुंडली में वृश्चिक राशि में होते हैं वह व्यक्ति जोशीला और क्रोधी होता है। इनमें अभिमान और वैराग्य की भावना रहती है। इनका स्वभाव गंभीर और ईष्यालु होता है। इस राशि में शनि की महादशा जब चलती है तब आर्थिक क्षति और मान-सम्मान की हानि होती है।

धनु राशि :
राशिचक्र में शनि का स्थान नवम है। इस राशि में शनि होने पर यह व्यक्ति को व्यावहारिक और ज्ञानवान बनाता है। व्यक्ति परिश्रमी और नेक विचारों वाला होता है। चतुराई और अक्लमंदी से काम करने वाला एवं दूसरों के उपकार को मानने वाला होता है। इस राशि में जब शनि की महादशा चलती है उस समय व्यक्ति को सुख और उत्तम फल प्राप्त होता है। शिक्षा के क्षेत्र में महादशा के दौरान सफलता मिलती है।

मकर राशि :
राशि चक्र की दसवीं राशि यानी मकर राशि में शनि व्यक्ति को परिश्रमी और ईश्वर के प्रति आस्थावान बनाता है। कारोबार में प्रगति, आर्थिक लाभ, जमीन जायदाद का लाभ यह शनि दिलाता है। शनि इनकी प्रकृति शंकालु बनाता है। लालच और स्वार्थ की भावना भी इनके अंदर रहती है।

कुंभ राशि :
जिनकी कुंडली में शनि एकादश भाव यानी कुंभ राशि में होता है वह व्यक्ति अहंकारी होता है। आर्थिक रूप से सामान्य रहते हैं। कूटनीतिक क्षेत्र में सफल और बुद्धिमान होते हैं। नेत्र रोग से पीडि़त होते हैं। व्यवहार कुशल और भाग्य के धनी होते हैं।

मीन राशि :
मीन राशिचक्र की 12वीं राशि है। मीन राशि में शनि स्थित होने पर यह व्यक्ति को गंभीर बनाता है। व्यक्ति दूसरों से ईर्ष्या रखने वाला व महत्वाकांक्षी होता है। इस राशि में शनि के होने पर व्यक्ति उदार और समाज में प्रतिष्ठित होता है। शनि इनकी आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनाए रखता है।

तिलक क्यों लगाना चाहिए ?



तिलक क्यों लगाना चाहिए ?

तिलक क्यों लगाना चाहिए ?

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक मनुष्य अपने धर्म को बड़े विस्वास एवं आस्था के साथ निभाता है! हिन्दू पूजा करते समय या कहीं जाते समय अवस्य तिलक लगता है! महिलाये भी सुहाग के प्रतीक चिन्ह हेतु तिलक लगाती है! महिलाये लाल तिलक ही लगाती है क्योकि पति जाते समय उस तिलक को देखकर जाता है, जो सूर्य की लालिमा का प्रतीक होता है,एवं तिलक को देखकर पति को ये प्रेरणा मिलती है कि आज का दिन सूर्य कि लालिमा जैसा ( सुखमय ) रहें! एवं हर मांगलिक कार्य,शादी-विवाह,धार्मिक आयोजन,सामाजिक आयोजन में व्यक्ति तिलक लगाकर जाता है !
किसी आयोजन में आने वाले व्यक्ति का स्वागत-सत्कार हम तिलक लगाकर ही करते है! विशेषकर शादी-विवाह में बहन-बेटी या सुहागन आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत तिलक लगाकर करती है! विशेषकर यह प्रथा मध्यप्रदेश में मालवा एवं निमाड़ में यह प्रथा आज भी है!



तिलक मस्तक पर दोनों भौंहों के बीच नासिका के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर लगाए जाते हैं जो हमारे चिंतन-मनन का स्थान है- यह चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है, इसे आज्ञा-चक्र भी कहते हैं।

पारिवारिक शांति एवं सुख सुबिधा के उपाय



पारिवारिक शांति एवं सुख सुबिधा के उपाय

पारिवारिक शांति एवं सुख सुबिधा के उपाय --> प्रत्येक व्यक्ति को सुखमय जीवन जीने की हरपल कामना रहती है! इस कामना को पूर्ण करने

          
के लिए मनुष्य नाना प्रकार के उपाय करता है,कई बार तो अपने जीवन से निराश हो जाता है एवं ज्योतिषियों के पास जाता है,अथवा तंत्र-मंत्र
के चक्कर में आकर अपना जीवन बर्वाद कर लेते है! अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए हर दिन व्यक्ति घर से निकलते समय ये सरल उपाय कर सकता है--------
सोमवार -> इस दिन  लाइनिंग या चौकड़ी ( चेक्स ) वाला वस्त्र  पहने एवं कांच में अपना चेहरा देखकर घर से निकले!!       
मंगलवार---> मंगलवार के दिन लाल या गुलाबी वस्त्र पहने एवं घर से  गुड खाकर निकले !
बुधवार--. बुधवार के दिन पीला वस्त्र पहने एवं घर से धनिया खाकर निकले !
गुरुवार--> गुरुवार के दिन सफ़ेद वस्त्र पहने एवं घर से जीरा खाकर निकले!
शुक्रवार--> शुक्रवार के दिन सफेद या हल्का पीला वस्त्र पहने एवं घर से दही खाकर निकले!
शनिवार--> शनिवार के दिन काला वस्त्र पहने एवं घर से अदरक खाकर निकले!
रविवार--> रविवार के दिन नीला वस्त्र पहने एवं घर से पान या घी खाकर निकले !
उपरोक्त उपाय के साथ-साथ अपने गुरु,कुलदेव एवं इष्टदेव का स्मरण करके घर से निकले आपके कार्य अवश्य पूर्ण होंगे!

Tuesday, 4 September 2012

सितम्बर २०१२ ज्योतिष की नजर से -->
 
सितम्बर में ग्रहों का राशियों पर परिभ्रमण एवं उनका प्रकृति पर प्रभाव क्या होता है,जानिये!
सूर्य का परिभ्रमण पूर्व के देशो में सुख प्रदान करेगा,दक्षिन एवं पश्चिम के देशो में घटना- दुर्घटना बनी रहेगी,उत्तर के देशो में युध्द का भय बना रहेगा! मंगल के तुला राशि पर परिभ्रमण से सभी धान्य महंगे होंगे,एवं उड़द,मुंग,सूत,कपास आदि वस्तु विशेष महंगी होंगे ! बुध के परिभ्रमण से धन्यो के भाव में स्थितरता आएगी,शुक्र के परिभ्रमण से धान्यो के सस्ते होने की संभावना है,शनि के कारण देश में राजनैतिक लोगो पर विपत्ति आएगी,१८ सितम्बर को सूर्य का राशि परिवर्तन करके कन्या राशि में भ्रमण करने से दक्षिन क देशो में सुख आएगा,पश्चिम एवं उत्तर के देशो में अशांति,पीड़ा रहेगी! पूर्व के देशो में संकट का वातावरण रहेगा! १५ सितम्बर को बुध का सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करने से सोने एवं शक्कर के व्यापारियों
को लाभ मिलेगा, इनके भाव में तेजी आएगी! शुक्र का राशि बदलकर सिंह राशि में परिभ्रमण करने से स्वर्ण,लाल वस्तुए,पशु के भाव के साथ-साथ
धान्य के भी भाव बढेंगे! परन्तु वर्षा कम होगी!
इस माह की कुंडली को आकाशीय द्रष्टि से देखे तो, सूर्य-बुध के साथ में रहने से कहीं अच्छी कही कम वर्षा होंगी,शुक्र के कारण खंड एवं कही कम वर्षा होंगी,दिल्ली,राजस्थान,हरियाणा,
उ.प्र.,उत्तराखंड,गुजरात,उड़ीसा,कर्णाटक,गोवा,आसाम,पंजाब,हिमाचल में कही अच्छी कही खंड वर्षा होंगी!

सितम्वर २०१२ में ध्दाद्श राशियों का फलादेश-->



मेष--> मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह स्थान-परिवर्तन वाला हो सकता है! कृषि कार्य में मध्यम लाभ मिलेगा,व्यापार में परेशानी आ सकती है,सहयोग में कमी रहेगी,मेहनत अधिक आय कम रहेगी,यात्रा में परेशानी आ सकती है,अत:
जरुरी कार्य आने पर ही यात्रा करे! मित्र से सहयोग मिलेगा! दि.२,१६ हुभ है,५,१३ अशुभ है! श्री कृष्ण-आराधना लाभप्रद है!
वृषभ--> वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह क़ानूनी ( न्यायलय सम्बन्धी ) लाभ वाला रहेगा!पारिवारिक सुख में वृध्दि होगी,स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी आ सकती है,कृषि लाभप्रद रहेगी,व्यापार मध्यम रहेगा,नोकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! किसी अनजान से दोस्ती न करे! दि.६.१२
शुभ है,२३ अशुभ है! श्री गणेश आराधना लाभप्रद है!
मिथुन--> मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! नोकरी में उन्नति होगी,व्यापार सामान्य रहेगा,कृषि सामान्य लाभ देगी,विधार्थी को तकलीफ का सामना करना पड़ेगा! व्यर्थ कार्यों पर धन व्यय होगा! अचानक हानि के योग है! पुराने मित्र से अनवन के योग है ध्यान
रखे! दि. ६,२५ शुभ है, १७ अशुभ है! गुरु आराधना करना लाभप्रद रहेगा!
कर्क-->कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह मांगलिक कार्य वाला रहेगा! विद्यार्थी के लिए कष्टप्रद रहेगा ,माता को कष्ट रहेगा ! भूमि सम्बंधित हानि होगी ! आय कम खर्च अधिक रहेगा, अचानक सामजिक यात्रा के योग बनेंगे! इस माह किसी अनजान से दोस्ती के योग है, अत:  सोचकर करे, उससे हानि हो सकती है! दि.७,१५ शुभ है, ४ अशुभ है! श्री शिव जी की आराधना लाभप्रद रहेगी!
सिंह-->सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह व्यापार वृध्दि वाला रहेगा!. विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा ! कृषि में उन्नति रहेगी ! भाई  से सहयोग मिलेगा! नॉकरी में अधिकारी खुश रहेंगे, स्त्री को कष्ट हो सकता है , ससुराल से परेशानी हो सकती है! दि:११,२२ शुभ है ,१७ अशुभ है! गणेश जी की आराधना लाभप्रद है !
कन्या-->कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह यात्रा में लाभ वाला रहेगा! स्थान-परिवर्तन के योग है.इससे लाभ मिलेगा! संतान की उन्नति होगी! स्वयं पर खर्च अधिक होगा! कृषि लाभप्रद रहेगी! नॉकरी में अड़चन रहेगी! मित्र द्वारा ख़ुशी प्राप्त होगी! राजनेतिक कार्य में लाभ होगा! दि:१८,२७ शुभ है, २४ अशुभ है! गणेश,गौरी की आराधना करे !
तुला--> तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह आर्थिक उन्नति वाला रहेगा! व्यापार में वृध्दि होगी, कृषि अच्छा लाभ देगी! नॉकरी में अधिकारी नाराज हो सकते हे, ध्यान रखे! पुराने मित्र से मनमुटाव के योग है! क़ानूनी उलझन से बचे ! माता-पिता को कष्ट रहेगा! दि:३,१२ लाभप्रद है ७ अशुभ है! राधा-कृष्ण आराधना लाभप्रद है !
वृश्चिक--> वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह व्यापार लाभ वाला रहेगा! कृषि मध्यम रहेगी! नौकरी में उन्नति होगी! संतान चिंता रहेगी! मानसिक परेशानी रहेगी! स्त्री द्वारा सहयोग प्राप्त होगा! पारिवारिक क्लेश रहेगा! मित्र से सहयोग प्राप्त होगा! धार्मिक यात्रा के योग है! दि. १,२५ शुभ है,8 अशुभ है! श्री कृष्ण आराधना लाभप्रद है!
धनु--> धनु राशि वाले जातको के लिए यह माह व्यापार वृध्दि वाला रहेगा! कृषि मध्यम रहेगी, नौकरी में उन्नति होगी,स्त्री को कष्ट रहेगा,माता-पिता को कष्ट रहेगा! विधार्थी को सफलता में तकलीफ आएगी,मित्र से सहयोग प्राप्त होगा! शुभ समाचार प्राप्त होंगे! दि.९.१८ शुभ है,३ अशुभ है! श्री-राम स्तुति लाभप्रद है!
मकर--> मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह लाभ वाला रहेगा! भूमि सम्बन्धी विवाद  हल (निपटारा ) होगा! व्यापार अच्छा रहेगा,कृषि लाभ देगी, नौकरी में उन्नति होगी,सन्तान से चिंता रहेगी,भाई से सहयोग प्राप्त होगा! अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे,मित्र सहयोग मिलेगा! दि. ३, १५ शुभ है,१९ अशुभ है! शिव आराधना लाभप्रद है!
कुम्भ--> कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह धार्मिक वाला रहेगा! कृषि लाभप्रद रहेगी,नौकरी में तकलीफ आएगी,माता-पिता से बिरोध
के योग है,परन्तु अचानक लाभ के योग है! वेरोजगार को नौकरी मिलगी! सन्तान से ख़ुशी प्राप्त होगी! दि. ६,१८ शुभ है,५ अशुभ है! गणेश आराधना लाभप्रद है!
मीन-->मीन राशि वाले जातको के लिए जातको के लिए यह माह सामान्य रहेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि सामान्य लाभ देगी,नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! प्रवास में पीड़ा रहेगी, स्वास्थ्य ख़राब रहेगा, शत्रु भय बना रहेगा! बहन को कष्ट के योग है,पत्नी से सहयोग प्राप्त होंगा! दि.१४,२६ शुभ है,१३ अशुभ है! श्री राधा-कृष्ण की आराधना लाभप्रद है!