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Tuesday, 9 October 2012

कल का मुहुर्त


कल का मुहुर्त --->कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहें ! कल आप कुछ नया कार्य करने जा रहें है,कुछ लेने जा रहे है,तो रुकिए हर कार्य करने के पहले कुछ विचार करे एवं अच्छा समय देखे ,ये सब समझने के लिए हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढ़े !
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 10
वार -- बुधवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934 photo
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु
अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> दशमी 
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--23
योग-- मातंग
करण--- वव
चंद्रमा---कर्क का चंद्रमा पुरे दिन   
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- दशमी का श्राद्ध
दिशा-शूल--उत्तर
मुहूर्त-- पुरे दिन भद्रा
शुभ समय--प्रात:06 से 09 .00 ,10 .30 से 12 .00 दोपहर, 1 .30 ,दोपहर 3 ,4 .30 से 06 शाम तक !   
सुझाव--घर में मोरपंख रखने से नकारात्मक उर्जा घर में नही आती !  

Monday, 8 October 2012

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त

कल का दिन आप के लिए मंगलमय रहें! आपके जीवन में कल उन्नति रूपी सूरज का प्रकश आये,कल आप यात्रा करने जा रहें है ,कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो ,पूंजी निवेश करने जा रहें है ,तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
 कल का मुहुर्त ---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 09
वार -- मंगलवार
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> नवमी 
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--22
योग-- स्थिर
करण--- तैतिल
चंद्रमा---कर्क   
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--- नवमी का श्राद्ध 
दिशा-शूल--वायव्य
मुहूर्त--शल्य चिकित्सा ,यात्रा , पूंजी निवेश
शुभ समय--प्रात:10 .30 से दोपहर 1 .30 ,दोपहर 3 से 4 .30 तक   
सुझाव-- घर के मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पल रखने से नकारात्मक ऊर्जा घर में आती है! 

Saturday, 6 October 2012

कल का मुहूर्त


कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहे ! आप कल कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
jain gahuli photo
 कल का मुहूर्त---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 8
वार -- सोमवार 
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> अष्टमी
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--21
योग-- काल
करण---वालब
चंद्रमा---मिथुन का रात्रि 2 :43 से कर्क का    
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष  
दिन का पर्व--अष्टमी का श्राद्ध,महालक्ष्मी पूजन 
दिशा-शूल--पूर्व
मुहूर्त--शल्य चिकित्सा ,यात्रा
शुभ समय--प्रात:6 से 7 :30 , 9 से 10 :30 , दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक   
सुझाव--श्राद्ध पक्ष में गाय, कुत्ते व कौए को भोजन खिलाने से पितृ प्रसन्न होते है !

कल का मुहुर्त

कल का मुहुर्त

कल का दिन आप के लिए प्रगतिशील रहे ! आप कल कुछ लेने जा रहे है ,मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे हो तो हमारा कल का मुहुर्त कॉलम पढकर जाए !
 कल का मुहुर्त ---> अंग्रेजी सन -->2012
अंग्रेजी माह -->अक्टुम्बर
अंग्रेजी तारीख --> 7
शालिवाहन - सम्वंत- 2069
 शक सवंत--
1934
 सम्वत्वसर का नाम- विश्र्वावसु

अयन--दक्षिणायन
ऋतु--शरद
पक्ष--कृष्ण
तिथि--> सप्तमी
हिजरी सन--1433
मुस्लिम माह--जिल्काद
तारीख--20
योग--ध्वांक्ष
करण--बव
चंद्रमा---मिथुन पुरे दिन    
ग्रहयोग---श्राद्ध पक्ष (विविध दोष ) 
दिन का पर्व--सप्तमी का श्राद्ध
दिशा-शूल--पश्चिम
मुहूर्त--पूंजी निवेश, प्रसूति स्नान , वाटिका रोपण ,शल्य चिकित्सा
शुभ समय--प्रात:8 :55 से 11 :55 तक दोपहर 1 :30 से 3 तक  
सुझाव--श्राद्ध पक्ष में पितरो के लिए तर्पण देने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है एवं कुल की वृद्धि होती है !

Friday, 5 October 2012

अक्टूम्बर २०१२ ज्योतिष की नजर से

-----> परिभ्रमण संसार के चक्र के शत से चल रहा है,परिवर्तन भी समय के साथ-साथ चलता रहता है,ये दोनों
न हो तो संसार रुक जाये! इस संसार में स्थरता आ जाये ! अक्टूम्बर २०१२ में ग्रहों का परिभ्रमण एवं उनका राशि परिवर्तन का संसार पर क्या
असर पड़ता है जानिये ---------------------
 
अक्टूम्बर २०१२ में पाँच मंगलवार पड़ रहें है,इसके प्रभाव से कहीं रक्तपात होगा तथा कहीं छत्रभंग होने का भय रहेगा! सूर्य का तुला राशि में परिभ्रमण करने से उत्तर के देशो में सुभिक्ष ( शुभ ) फल देगा,पश्चिम के देशो में युध्द आदि की सम्भावना से भय का वातावरण रहेगा,दक्षिन एवं पूर्व
के देशो में पीड़ा एवं अशांति रहेगी! मंगल का वृश्चिक राशि में परिभ्रमण करने से सभी द्रव्य महंगे होंगे तथा शासको में क्रोध की अधिकता होगी,
शासको एवं जनता में टकराव होगा ! बुध का तुला राशि में परिभ्रमण करने से क्लेश,कलह,अशांति एवं का वातावरण बनेगा! शुक्र का सिंह राशि में परिभ्रमण करने से सोने के भाव में फर्क आएगा  , शनि का प्रभाव सामान्य रहेगा! १७ अक्तुम्वर को सूर्य अपनी राशि परिवर्तन कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा जिसके प्रभाव से पश्चिम के देशो में सुख होगा,उत्तर एवं पूर्व के देशो में कष्ट तथा बालको को पीड़ा रहेगी,दक्षिन के देशो में युध्द का भय रहेगा! २४ अक्टूम्बर को बुध अपनी राशि परिवर्तन कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा! "बुधो वृश्चिक राशिस्थो सुभिक्षम तत्र धान्यानां लोकानां च शुभम भवेत् "!! अर्थात बुध का वृश्चिक राशि में परिभ्रमण करने से धान्य का सुभिक्ष होगा एवं लोंग सुखी होंगे एवं शांति होगी, घी, तेल के भाव में परिवर्तन आएगा! २३ अक्टूम्बर को शुक्र भी अपनी राशि परिवर्तन कर कन्या राशि में प्रवेश करेगा, शुक्र का कन्या राशि में परिभ्रमण करने से सभी धान्यो के भाव में परिवर्तन होगा,
इस मह की कुंडली को मौसम की द्रष्टि से देखे तो सूर्य के आगे बुध के होने से तेज वायु के साथ आंधी-तूफान की संभावना है! कुछ स्थानों में बादल के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होगी! जम्मू-कश्मीर, हिमाचल-प्रदेश,हरियाणा,पंजाब,दि
ल्ली,राजस्थान,आसाम,गुजरात,उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश,
उत्तराखंड में कुछ स्थानों में हलकी बूंदाबांदी होगी! ऋतु परिवर्तन के का अहसास होने लगेगा!

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न--

श्राध्दपक्ष में कैसे करें पितृ को प्रसन्न---> प्रत्येक मनुष्य की इच्छा रहती है कि वह एवं उसका परिवार सुखी एवं संपन्न रहें! मनुष्य ने अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए देवता के साथ-साथ अपने पितरो का भी पूजन करना चाहिए! कैसे करे पितृ पूजन--------

यहाँ पर पाठको की सुबिधा के लिए संक्षिप्त में सरल हिंदी भाषा में पजन ( तर्पण ) बिधि दे रहें है!  ( तर्पण ही पत्र पजन है!)
सर्वप्रथम अपने पास शुध्द जल,बैठने का आसन ( कुशा का हो ),बड़ी थाली या ताम्रण ( ताम्बे कि प्लेट ), कच्चा दूध,गुलाब के फुल ,फुल-माला, कुशा ,सुपारी, जों,काली तिल,जनेऊ इत्यादी पास में रखे!
आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करे ॐ केशवाय नम:,ॐ माधवाय नम:,ॐ गोविन्दाय नम: आचमन के बाद हाथ धोकर अपने उपर जल छिडके अर्थात पवित्र हो,फिर गायत्री मन्त्र से शिखा बाँधकर तिलक लगाकर कुशे की पवित्री (अंगूठी बनाकर) अनामिका ऊँगली में पहन कर हाथ में जल ,सुपारी,सिक्का,फूल लेकर निम्न संकल्प ले !
अपना नाम एवं गोत्र उच्चारण करे फिर बोले अध् श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्
त्यर्थ देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणम करिष्ये! !
फिर थाली या ताम्रण में जल,कच्चा दूध,गुलाब की पंखुड़ी डाले,फिर हाथ में चावल लेकर देवता एवं ऋषियों का आवाहन करे! स्वयं पूर्व मुख करके बैठे,जनेऊ को सव्य रखे! कुशा के अग्र भाग को पूर्व की ओर रखे,देवतीर्थ से अर्थात दाये हाथ की अंगुलियों के अग्रभाग से तर्पण दे, इसी प्रकार ऋषियों को तर्पण दे!
फिर उत्तर मुख करके जनेऊ को कंठी करके ( माला जैसी ) पहने एवं पालकी लगाकर बैठे एवं दोनों हथेलियों के बीच से जल गिरकर दिव्य मनुष्य को तर्पण दे,
इसके बाद दक्षिन मुख बैठकर,जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखकर बाएं हाथ के नीचे ले जाये, थाली या ताम्रण में काली तिल छोड़े
फिर काली तिल हाथ में लेकर अपने पितरो का आवाहन करे!
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम ;
फिर पितृ तीर्थ से अर्थात अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से तर्पण दे !
१. अपने गोत्र का उच्चारण करे एवं पिता का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
२. अपने गोत्र का उच्चारण करे , दादाजी (पितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
३. अपने गोत्र का उच्चारण करे पिताजी के दादाजी(प्रपितामह) का नाम लेकर तीन बार उनको तर्पण दे !
४.अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे ,नाना का नाम लेकर उनको तीन बार तर्पण दे !
५. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के पिताजी(परनाना) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
६. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नाना के दादा (वृद्ध परनाना ) का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
७. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानी का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे  !
८. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की माँ (परनानी )  का नाम लेकर तीन बार तर्पण दे !
९. अपने नाना के गोत्र का उच्चारण करे नानाजी की दादी (वृद्ध परनानी )  का नाम  लेकर तीन बार तर्पण दे !
१०.अपने गोत्र का उच्चारण करे अपनी दिवंगत (जो स्वर्गवासी हो ) पत्नी से लेकर परिवार के सभी दिवंगत सदस्य का नाम लेकर तीन-तीन बार -तर्पण दे ! परिवार के साथ -साथ दिवंगत बुआ, मामा, मौसी, मित्र,एवं गुरु को भी तर्पण दे !
विशेष-->जिनके नाम याद नही हो,तो रूद्र,विष्णु,एवं ब्रम्हा जी का नाम उच्चारण कर ले!
इसके बाद भगवान सूर्य को जल चदाये!  फिर कंडे पर गुड घी कि धूप दे, धूप के बाद पाँच भोग निकले जो  पंचबलीकहलाती है!
१. गाय के लिए सव्य होकर पत्ते प्र्भोग लगाकर गाय को दे,
२. स्वान (कुत्ते) के लिए जनेऊ को कंठी करके पत्ते पर भोग लगाकर कुत्ते को दे,
कौओं के लिए ( ककाब्ली ) असावी होकर पृथ्वी पर भोग ल लगाकर कौओं को दे,
४.( देवादिबली ) देवताओ के लिए सव्य होकर पत्ते पर बोग अतिथि को दे,
५.पिपीलिका के लिए सव्य होकर पत्ते पर भोग लगाकर पिपीलिका को दे,
इसके बाद  हाथ में जल लेकर ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: ॐ विष्णवे नम: बोलकर ये कर्म भगवान विष्णु जी के चरणों में छोड़ दे!
इस कर्म से आपके पत्र बहुत प्रसन्न होंगे एवं आपके मनोरथ पूर्ण करेंगे!

Wednesday, 3 October 2012

अक्टूम्बर २०१२ ध्दादश राशियों का फलादेश-




अक्टूम्बर २०१२ में  ध्दादश राशियों का फलादेश----> मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेंगा! स्त्री पक्ष की प्रधानता रहेंगी,रोगी व्यक्ति  को रोग से राहत  मिलेगी व्यापार सामान्य रहेगा,नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग है,धार्मिक कार्य में विघ्न आयेंगे! विधार्थी को पढाई
में अडचन आएगी! दि . १०,१५ शुभ है,४ अशुभ है!  गायत्री मंत्र के जाप लाभदायक है!
वृषभ-->वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह भूमि-वाहन के लाभ वाला रहेगा! व्यापारी वर्ग को लाभ मिलेगा,नौकरी में उन्नति होगी, कृषि सामान्य लाभ देगी! शारीरिक कष्ट के योग है ध्यान रखे! पुराने विवाद में व्यय होगा,किसी मित्र से सहयोग प्राप्त करे लाभ मिलेगा ! दि.६,१८ शुभ है,
१४ अशुभ है! राधाकृष्ण की आराधना शुभ है!     
मिथुन-->मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह आध्यात्मिक तरक्की वाला रहेगा! न्यायिक कार्यों में सफलता मिलेगी,परिवार से पूर्ण सहयोग
मिलेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि में भी अच्छा लाभ मिलेगा,नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! दि.७,२१ शुभ है, ५ अशुभ है! श्री गणेश आराधना शुभ
है!
कर्क-->कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होंगे,व्यापार सामान्य रहेगा, कृषि मध्यम लाभ देगी,
नौकरी में मानसिक व्यग्रता बनी रहेगी, माता के पक्ष से सुख प्राप्त होगा,संतान की चिंता रहेगी! दि.१०,२४ शुभ है,३ अशुभ है! श्री सीताराम की सेवा
लाभप्रद है!
सिंह-->सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह सुख वाला रहेगा! माता से लाभ मिलेगा,कार्य की स्थिति उत्तम रहेगी, कृषि लाभ देगी, नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! राजनैतिक स्थिति में सुधार होगा एवं लाभ मिलेगा! दि.२,१४ शुभ है,
कन्या-->कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह स्थान-परिवर्तन वाला रहेगा! विधार्थी को लाभ मिलेगा,इस माह परिश्रम अधिक रहेगा,नौकरी
में उन्नति होगी,कृषि कार्य में लाभ मिलेगा, स्वास्थ्य में सुधार होगा, व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि लाभ देगी! दि.२,१८ शुभ है,२० अशुभ है!
राधाकृष्ण की सेवा लाभप्रद है!
तुला-->तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह मांगलिक कार्य वाला रहेगा! शत्रु पक्ष परास्त होगा,व्यापार में उन्नति होगी,नौकरी में अधिकारी
नाराज हो सकते है ध्यान दे, स्त्री को पीड़ा रहेगी, पारिवारिक तनाव रहेगा! दि.१५,२४ शुभ है, ३० अशुभ है! गायत्री मंत्र लाभदायक है!
वृश्चिक-->वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह कष्ट-प्रद हो सकता है! व्यर्थ खर्च होगा, व्यापार में हानि हो सकती है,नौकरी में परेशानी आएगी, वाहन से हानि के योग बनते है! सहयोग में कमी आएगी, दि.६,२१ अशुभ है,५ अशुभ है! सीता राम की सेवा लाभप्रद है!
धनु-->धनु राशि वाले जातको के लिए यह विशेष कार्य में सफलता वाला रहेगा!नौकरी में उच्चपद प्राप्त होगा,राजनैतिक लाभ मिलेगा,व्यापार में लाभ मिलेगा, कृषि ठीक रहेगी,नौकरी में उन्नति रहेगी,स्वास्थ्य का ध्यान रखे दि.३,१५ शुभ है,७अशुभ है श्री राम सेवा लाभप्रद है!
मकर-->मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह मुकदमे में सफलता वाला रहेगा! व्यापार में उन्नति होगी,माता को पीड़ा रहेगी, नौकरी में ध्यान दे, घर में मांगलिक कार्य होन्ग,परन्तु पारिवारिक बिरोध होगा, दि.६,९ शभ है,१९ अशुभ है! शिव आराधना शुभ है!
कुम्भ -->कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा! मांगलिक कार्य होगा,परिश्रम अधिक करना पड़ेगा, व्यापार सामान्य रहेगा, नौकरी में तकलीफ आएगी,कृषि घटा देगी,न्यायिक मुकदमो में सफलता मिलेगी दि.५.१० शुभ है,३ अशुभ है! गायत्री आराधना शुभ है!
मीन-->मीन राशि वाले जातको के लिए यह माह शारीरिक,मानसिक पीड़ा वाला रहेगा! वाहन यात्रा में नुकशान हो सकता है,स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है,व्यापार में सही लाभ नही मिलेगा,कृषि में नुकसान होगा,दि.४,१२ शुभ है, १६ अशुभ है! देवी जी की आराधना लाभप्रद रहेगी!





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