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Wednesday, 18 July 2012

श्रावण में राशि अनुसार करें शिव आराधना

श्रावण में राशि अनुसार करें शिव आराधना

- सुरेंद्र बिल्लौरे
वर्तमान में श्रावण  मास चल रहा है,जो कि 2.8.2012 अर्थात श्रवण पूर्णिमा (राखी) को समाप्त होगा, दक्षिण भारतीय पंचांग अनुसार 20.7.2012 से श्रावण प्रारम्भ हो रहा है!

प्रभु शिव को साधारण भक्ति से, साधारण पूजा से प्रसन्न किया जा सकता हैं। शिव अपने भक्तो की छोटी-सी आराधना से प्रसन्न हो जाते है। श्रावण मास में प्रभु को प्रसन्न करने के लिए अपनी राशि अनुसार करें उनकी आराधना। जानिए कैसे?

मेष- मेष राशि वाले जातक गुलाल से शिव का विशेष पूजन करें एवं पूरे श्रावण मास में 'ॐ ममलेश्वराय नम:' मंत्र का जाप करें।

वृषभ- वृषभ राशि वाले जातक दूध से शिवजी का अभिषेक करें। 'ॐ नागेश्वराय नम:' मंत्र का जाप करें।

मिथुन- मिथुन राशि वाले जातक शिवजी का गन्ने से अभिषेक करें। 'भूतेश्वराय नम:' का जाप करें।

कर्क- कर्क राशि वाले जातक शिवजी का पंचामृत से अभिषेक करें। महादेव के 'द्वादश नाम' का स्मरण करें।
सिंह- सिंह राशि वाले जातक शिवजी का शहद से अभिषेक करें। 'ॐ नम: शिवाय' की रोज एक माला करें।

कन्या- कन्या राशि वाले जातक शिवजी का सिर्फ शुद्ध जल से अभिषेक करें। 'शिव-चालिसा' का पाठ करें।

तुला- तुला राशि वाले जातक शिवजी का दही से अभिषेक करें। 'शिवाष्टक' का पाठ करें।

वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातक शिवजी का दूध, घी से अभिषेक करें। 'ॐ अंगारेश्वराय नम:' का जाप करें।

धनु- धनु राशि वाले जातक शिवजी का दूध से अभिषेक करें। 'ॐ रामेश्वराय नम:' का जाप करें।

मकर- मकर राशि वाले जातक शिवजी का अनार के रस से अभिषेक करें। 'शिव सहस्त्रनाम' का उच्चारण करें।

कुंभ- कुंभ राशि वाले जातक शिवजी का दूध, दही, शहद, शक्कर, घी, सभी से अलग-अलग अभिषेक करें। 'ॐ शिवाय नम:' का जाप करें।

मीन- मीन राशि वाले जातक शिवजी का ऋतुफल (जो वर्तमान में खास फल हो) से अभिषेक करें। 'ॐ भौमेश्वराय नम:' का जाप करें।

जो मनुष्य पूरे श्रावण में शिवजी का पूजन, जप-तप, आराधना, भक्ति करता है। वह अवश्य इस लोक में सुख भोग कर शिवलोक को प्राप्त होता है।

विशेष : - जो दम्पत्ति नि:संतान हो, वह शिवजी को श्रावण महीने के किसी भी दिन से 40 दिन तक घी चढ़ाता है, तो उसके घर संतान की प्राप्ति होती है।

Friday, 1 June 2012

जून २०१२ में ध्दाद्श राशियों का फलादेश

जून २०१२ में ध्दाद्श राशियों का फलादेश --मेष-->मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेगा! व्यापार मध्यम रहेगा,कृषि सामान्य फल देगी, मासिक पीड़ा रहगी, शारीरिक  कमजोरी रहेगी, वाहन एवं यात्रा से कष्ट के योग है,साबधानी रखे! फिजूल खर्च  बढ़ेगा ! व्यवहार से पूर्ण सफलता मिलेगी! दिनांक ५.१० शुभ है,२३ अशुभ है! रामरक्षास्त्रोत का पाठ फायदेमंद रहेगा!
वृषभ--> वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह कोर्ट-कचहरी में सफलता वाला रहेगा!  परिवार में सुख मिलेगा! व्यापार अच्छा  रहेगा,कृषि ठीक
रहेगी, नॉकरी में उन्नति होगी! यात्रा के योग है, शत्रु पक्ष से निजात मिलेगी! ३,१५ शुभ है, १० अशुभ है! शिव आराधना शुभ है!
मिथुन--> मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह लाभ वाला रहेगा! विधार्थी को सफलता मिलेगी,शिक्षा की स्थिति मजबूत होगी, पत्नि को कष्ट रहेगा, शत्रु पराजित होंगे! व्यापार लाभ देगा, कृषि लाभप्रद रहेगी, नोकारी में सफलता रहेगी!  दिनांक १७,२६ शुभ है, ५ अशुभ है! शिव शक्ति आराधना लाभप्रद रहेगी!
कर्क--> कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह जमीं जायदाद से लाभ वाली रहेगी! व्यापार मध्यम रहेगा,नॉकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! विधा के कार्य में परेशानी आएगी,पारिवारिक कलह रहेगा,नेत्र पीड़ा के योग बनते है, ध्यान रखे! दोस्त से सहायता मिलेगी! दिनांक ११, १८ शुभ है, ४ अशुभ है! शिव शक्ति आराधना शुभ है!
सिंह--> सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह पराक्रम वृध्दि वाला रहेगा! पारिवारिक सुख में वृध्दि होगी, वाहन सम्वन्धी सुख मिलेगा, बिधार्थी को सफलता मिलेगी! व्यापार मध्यम रहेगा, कृषि लाभ देगी, नॉकरी में सफलता मिलेगी! रिश्तेदार से सहायता मिलेगी! १८,२२ शुभ है,
२९ अशुभ है! श्री कृष्ण की आराधना शुभ है!
कन्या--> कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह सामाजिक कार्यों से लाभ वाला रहेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि में सफलता मिलेगी, नॉकरी
में उन्नति होगी! रिश्तेदारों से मतभेद के योग बनते है, सावधानी से कार्य करे! शत्रु पक्ष का  ध्यान रखे, सावधान रहें! किसी दोस्त से सहायता
मिलेगी! दिनांक ५,१५ शुभ है, २७ अशुभ है! राधा-कृष्ण आराधना चलने दे, लाभप्रद है!
तुला-->तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह राजनीतिक क्षेत्र में सफलता वाला रहेगा! व्यापार  में लाभ मिलेगा, कृषि में हानि के योग है,
नॉकरी में अधिकारी खुश रहेगा! बिधार्थी को लाभ मिलेगा, पत्नि को कष्ट रहेगा, धन हानि के योग है! संगति सोचकर करे हानि हो सकती है! दिनांक १४,२८ शुभ है, १० अशुभ है! रामसीता की भक्ति लाभप्रद रहेगी!
वृश्चिक--> वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेगा! पारिवारिक कलह के योग है, सावधानी से व्यवहार करे, शारीरिक कष्ट रहेगा,यात्रा से हानि होगी, विधा में अड़चन आएगी, पत्नि को कष्ट के योग, व्यापार मध्यम रहेगा,कृषि सामान्य रहेगी, नॉकरी में परेशानी आ
सकती है ध्यान से करे! किसी मित्र से सहयोग मिलेगा! दिनांक २,८ शुभ है, २४ अशुभ है! राम आराधना शुभ है!
धनु--> धनु राशि वाले जातको के लिए  यह माह संतान सुख वाला रहेगा ! विधार्थी को सफलता मिलेगी, वाहन से लाभ मिलेगा, समाज में सम्मान होगा, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा! किसी पुराने मित्र से मिलन होगा! दिनांक ८,१६ शुभ है,१७ अशुभ है! शिव-शक्ति की आराधना शुभ है!
मकर--> मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह पूर्ण सफलता वाला रहेगा! व्यापार में लाभ मिलेगा,माता से सुख मिलेगा,पारिवारिक सुख में वृध्दि होगी,कार्य क्षेत्र में सफलता मिलेगी! इसी के साथ स्थान-परिवर्तन के योग है! नॉकरी में उन्नति होगी, कृषि मध्यम रहेगी! दिनांक ३,१८ शुभ है,७ अशुभ है! देवी आराधना शुभ है!
कुम्भ--> कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह तीर्थ यात्रा एवं धर्म लाभ वाला रहेगा! माता-पिता को कष्ट के योग है, जमींन जायदाद से नुकसान होगा! नॉकरी  ठीक रहेगा , व्यापार अच्छा रहेगा! मित्रो से सहयोग मिलेगा! विधार्थी को सफलता मिलेगी! दिनांक ७,२८ शुभ है, २९ अशुभ है! श्री राम, हनुमान सेवा लाभप्रद है!
मीन--> मीन राशि वाले जातको के लिए यह माह आर्थिक लाभ वाला रहेगा! इस माह मांगलिक कार्य में खर्च होगा,व्यापार मध्यम रहेगा, कृषि लाभ देगी, नॉकरी में उन्नति होगी! स्वास्थ्य पीड़ा रहेगी, वाहन से भय रहेगा, यात्रा में कष्ट हो सकता है, अत: आवश्यक न हो तो यात्रा न करे!
दिनांक ५,२० शुभ है, ४ अशुभ है! श्री कृष्ण आराधना लाभप्रद है!  

Saturday, 26 March 2011

kumbh lgan ka vivran

धनिष्ट नक्षत्र के अंतिम दो चरणों ,शतभिषा के पूर्ण चरण  के साथ पूर्ण भद्र पद के तीन चरणों के मध्य कुम्भं राशी बनती है !कुम्भ राशी अपने अप मई एक बलिष्ट राशी है!इस राशी का स्वामी शनि देव है !मकर एवं मीन के मध्य विराजमान है!एवं लगन के बारे मई विस्तृत से जानिए !कुम्भ लग्न मई जन्म लेने वाले के लक्ष्ण निचे दर्शाए है !कुम्भ लग्न हो तो माता का शिर पश्चिम को जीर्ण वस्त्र कुछ काल कम्बल ओदा हो साधारण शित क्रू भोजन किया हो ,पिता घर पर न हो !स्त्रीया ४ ,२ एवं १ स्त्री बाद मे आइ  !   स्त्रियों मे एक गर्भिणी हो !बालक थोडा राये ,बालक के होठ  मोटे ,मस्तक लम्बा प्रकृति गर्म ये सारे लक्ष्ण कुम्भ राशी वाले के होते है !
            इस लग्न वाले के लिए बुध तथा गृह शुभ फलदायक इसके विपरीत चन्द्रमा ,सूर्य ,मंगल तथा गुरु दुःख दायक गृह होते है !इस लग्न मे जन्म  लेने वाले जातक की वृष मिथुन , तुला ,व  मकर राशी वालो से मित्रता  रहती है !परन्तु मेष ,कर्क ,सिह व वृषभ राशी वाले वालो से विरोध रहता है !इस लग्न मे जन्म लेने वाले जातक को कभी कभी पूर्वाभाश हो जाता है !कुम्भ लग्न वाले जातक की कुंडली मे सूर्य,बुध ,तथा गुरु तृतीय भाव मे हो तो सूर्य की महादशा पूर्ण सुख सम्पति देती है !
            कुम्भ लग्न मे शुभ ग्रह होने पर जातक के यजस्वी होने का योग बनता है !एवं नये कार्य व अविष्कार मे सफलता दिलाता है!
            कुम्भ लग्न मे लग्नधिपति शनि तथा धनेश गुरु का परस्पर यदि स्थान परिवर्तन हो तो बृहस्पति की महादशा मे जातक को मिश्रित फल मिलता है!कुम्भ लग्न छठा चंद्रमा हो तो जातक कमजोर होता है !एवं शक्त व नेदा रोगी हो सकता है !एवं दुर्घटना होने का भी रहता है!

Wednesday, 26 January 2011

happy-repuliceday

सभी भारतीयों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाए !

Sunday, 2 January 2011

meen--ka--svbhav

          राशी के प्रथम चरण में मेष एवं अंतिम चरण में मीन आता है! पूर्वाभाद्रपद के अंतिम चरण से रेवती नक्षत्र
के अंतिम चरण तक मीन राशी बिधमान रहती है! इस राशी का स्वामी गुरु है!
          इस लग्न में जन्म वाला जातक लग्न का स्वामी शुभ होने पर  सुंदर, रूपवान,धनी, ईमानदार अपने कार्य में
निष्ठां रखने वाला एवं कार्य क्षेत्र में माननीय पद पर पहुँचने वाला एवं सीधे स्वभाव वाला जरूरत मंद व्यक्ति की मदद
करने वाला होता है, एवं लेखक या कवि बनाने के योग बनते है! परन्तु लग्न में क्रूर ग्रह स्थित हो, या उसकी द्रष्टि
पड़ रही हो,तो जातक मादक द्रव्य लेने बाला या व्यभिचारी शराबी हो सकता है, अथवा होने के प्रबल योग रहते है!
लेखक, दुसरो की हमेशा सहायता करने वाला, गुप्त बिधा का ज्ञाता, देश भक्ति रखने वाला  व्यक्ति इसी लग्न में
पैदा होता है! इस लग्न के जातक समाज सेवी, राजनीती, तथा स्वास्थ्य सेवा में नर्स की नॉकरी करना ज्यादा पसंद
करते है!
          लग्नेश गुरु  तीसरे भाव में हो, तो भैयो की संख्या ज्यादा एवं बारहवे भाव में हो, तो पिता से सहयोग की सम्भावना बड़ती है!
        मीन लग्न में  उत्पन्न जातक की कुंडली में सातवे भाव में शनी या शुक्र की द्रष्टि पड़ जाये, तो तो पत्नी से तलाक होने संभावना बड़ जाती है!
        मीन लग्न में यदि शुक्र उच्च का हो तो व्यक्ति संगीत में रूचि रखने वाला, कलाकार बनाता है!
         मीन लग्न की कुंडली में मंगल बारहवे भाव में होने पर या उसकी दशा महादशा आने पर  किसी भी विभाग या
   देश का शासक बनाता है! परन्तु यदि शनी की द्रष्टि पड़ रही हो, तो जेल भिजवा सकता है!
         लग्नाधिपति गुरु यदि पंचम भाव में विराजमान हो, तो अनेक प्रकार की यात्रा करवाता है, एवं गुरु महादशा में उच्च पद पर पहुँचाता है!
         इस लग्न में बुध अच्छा नही होता है, इसकी (बुध) की महादशा में स्थान परिवर्तन कराता है! यदि बुध व्यय भाव में बैठा है, तो ग्रहस्थी में स्वास्थ्य खराब, मित्र, परिवार से झगडा करा सकता है!
      मीन लग्न वालो ने पुखराज धारण करना चाहिए!

      इति शुभम
 

Saturday, 1 January 2011

happy--new--year--2011

                         
                                                                                                             जय श्री क्रष्ण                 
सभी पाठको को नवबर्ष की शुभकामना ! नवबर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो! श्री क्रष्ण आप सभी को हर कदम
पर उन्नति एवं सुख- वैभव प्रदान करे! इसी कामना के साथ आपका
        पंडित सुरेन्द्र बिल्लोरे देवास
           (म. प्र.) भारत मो, ९८९३०७६३६५, 9479833629.

Tuesday, 28 December 2010

kundli me rahu ki drsht yevm fal

            पिछले लेख में आपने पढ़ा कुंडली में प्रथम भाव से अष्टम भाव तक राहू की द्रष्टि पड़ती है, तो जातक को क्या सुभ- अशुभ फल देता है! आगे पढ़े नवम भाव से ध्दाद्श भाव तक राहू की द्रष्टि का जातक पर शुभ- अशुभ प्रभाव !
नवम भाव--> राहू की  पूर्ण द्रष्टि नवम भाव पर पड़ती है, तो जातक को आर्थिक- सम्पन्न, भोगी पराक्रमी एवं सन्तति -वान बनाता है! परन्तु बड़े भाई के सुख से वंचित कर देता है!
दशम भाव --> राहू पूर्ण द्रष्टि से दशम भाव को देखता है, तो राजसम्मान एवं उधोग वाला बनाता है, परन्तु माता -
विहीन बना सकता है! एवं जातक के पिता को कष्ट देता है!
एकादश भाव --> राहू पूर्ण द्रष्टि से एकादश भाव को देखता है, तो जातक को अल्प लाभ देता है! इसी के साथ जातक सन्तति कष्ट के साथ नीच कर्म में रत रहता है!
ध्दाद्श भाव --> राहू पूर्ण द्रष्टि से ध्दाद्श भाव को देखता है, तो जातक को शत्रुनाशक,कुमार्गी एवं गलत धन खर्च करने वाला एवं दरिद्री बनाता है!
विशेष --> राहू कुंडली में लग्न श्थान पर कर्क अथवा व्रश्चिक राशी का हो,तो जातक  सिध्दी प्राप्त कर ख्याति प्राप्त करता है! परन्तु राहू धनु अथवा मीन राशी का हो, तो पिशाच व्रत्ति उत्पन्न करता है!
                 राहू यदि शुभ श्थान में हो अथवा शुभ प्रभाव दे रह हो, तो जातक जीवन में  किसी जुआरी, शराबी या अपराध करने वाले के  सम्पर्क में रहने पर भी शुद्ध एवं, सात्विक प्रव्रत्ति का रहता है! 
           राहू कुंडली में अलग - अलग भाव में रहने पर जातक को क्या शुभ- अशुभ प्रभाव देता है, जानने के लिए
पढ़े आचार्य सुरेन्द्र. ब्लोग्सपोत.कॉमं
                                   इति शुभम